संजय कुमार शाण्डिल्य की कविताएँ।

संजय कुमार शाण्डिल्य अक्सर ऐसा होता है कि हम किसी संकोच या भय की वजह से वे बातें नहीं कह पाते जो अपने समय की जरुरी और ईमानदार बातें होती हैं। एक कवि इसे न केवल महसूस करता है बल्कि अपनी कविता में इसे कुछ इस तरह दर्ज करता है ‘जो मैं बोल नहीं पाता […]

संजय कुमार शाण्डिल्य की कविताएँ

संजय कुमार शाण्डिल्य यह सच है कि कट्टरवादिता अरसा पहले से रही है और आगे भी रहेगी। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि उसके खिलाफ बोलने वाले लोग भी इस दुनिया में रहेंगे। नरेन्द्र दाभोलकर हो या फिर गोविन्द पानसरे सच बोलने की सजा पा चुके हैं। कहना न होगा कि साम्प्रदायिक ताकतें […]

संजय कुमार शाण्डिल्य की कविताएँ

संजय कुमार शाण्डिल्य समकालीन कवियों में संजय का नाम मेरे लिए बिल्कुल नया है. हालांकि उनकी कविताएँ यह बताती हैं कि वे नए कवि नहीं बल्कि एक परिपक्व कवि हैं. उनकी कविताओं की बनक सामान्य तौर पर आज लिख रखे तमाम कवियों से अलग है. यह बनक एक दो दिन में निर्मित नहीं होता बल्कि […]