श्रीराम त्रिपाठी की कहानी ‘दादी, हाथी और मैं’

श्रीराम त्रिपाठी अभी तक हम श्री राम त्रिपाठी की धारदार आलोचना से ही परिचित हैं. शायद कम लोगों को ही यह पता हो कि त्रिपाठी जी ने अपने लेखकीय जीवन की शुरुआत बतौर एक कहानीकार की. इनकी कहानियों में भी हम यह आसानी से देख सकते हैं कि कैसे जीवन की वह ध्वनियाँ यहाँ बारीकी […]

श्रीराम त्रिपाठी का एक आलेख ‘मुर्दहिया’

तुलसी राम बीते 13 फरवरी 2015 को हिन्दी साहित्य की एक ऐसी क्षति हुई जिसकी भरपाई हो पाना नामुमकिन है। तुलसीराम का जन्म आजमगढ़ के धरमपुर में एक जुलाई 1949 को हुआ था। प्राथमिक शिक्षा गाँव से ही हुई। आगे की पढाई बी एच यू और जवाहर लाल नेहरू विश्व   विद्यालय से हुई। फिर ये […]

श्रीराम त्रिपाठी का केदारनाथ अग्रवाल पर केन्द्रित आलेख ‘सोच-समझ कर ही गढ़ते हैं’

वरिष्ठ आलोचक श्रीराम त्रिपाठी का आज जन्मदिन है. इस अवसर पर उनके दीर्घायु और सतत रचनाशील रहने की कामना करते हुए हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं उन्हीं का लिखा एक आलेख जो जन कवि केदार नाथ अग्रवाल पर केन्द्रित है. तो आइए पढ़ते हैं यह आलेख      सोच-समझ […]

श्रीराम त्रिपाठी का श्रद्धांजलि लेख ‘वह ज्योति अचानक सदा को खो गयी’

समय कितनी तेजी से बीत जाता है, इसका हम अंदाजा नहीं लगा सकते। पिछले इक्कीस जून को  मनहूश  खबर मिली थी कि प्रख्यात आलोचक शिव कुमार मिश्र नहीं रहे। हमारे लिए यह खबर बज्रपात की तरह थी। इस दुखद घटना को अब एक वर्ष होने जा रहे हैं। इस अवसर पर शिव कुमार जी को […]

श्रीराम त्रिपाठी का आलेख ‘कृषक-कृषक का गुणन’

आलोचना एक दुष्कर कर्म है. आम तौर पर लोग आलोचना का मतलब उखाड़-पछाड़ या रचना की पंक्तिबद्ध व्याख्या से लगा लेते हैं जबकि इन सबसे इतर आलोचना रचना के ही समानान्तर उस का एक पुनर्पाठ करती है. रचना के समानान्तर खड़ी हो कर उससे बोलती-बतियाती है और  उसे फिर से अपने तईं पुनर्रचित करती है. […]

श्रीराम त्रिपाठी का आलेख ‘आलोचना : इस समय’

साहित्य में आमतौर पर आलोचना को रचना के पीछे-पीछे चलने वाली विधा माना जाता है। लेकिन वरिष्ठ आलोचक श्रीराम त्रिपाठी आलोचना को भी रचना कर्म मानते हैं। इसी क्रम में वे कहते हैं – ‘आलोचना और सर्जना को लाख विरोधों के बावजूद एक-दूसरे से संयोजित होना ही पड़ेगा। अन्यथा दोनों का बचना मुमकिन नहीं।’ आलोचक […]