श्रीकान्त पाण्डेय का आलेख ‘मरघट में तूं साज रही दिल्ली कैसे श्रृंगार?’

श्रीकान्त पाण्डेय राजनीतिज्ञों के लिए साहित्य और संस्कृति हमेशा एक टेढ़ीखीर होती है।शौकिया तौर पर वे इसे आजमा कर मुसीबत को आमंत्रण दे देते हैं। हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को बिहार के चुनावों के समय दिनकर की याद आई है।अब साहब को यह याद क्यों आयी है इसे समझना थोडा भी मुश्किल नहीं।भाई, जाति-धर्म का […]