शैलेंद्र शांत की कविताएँ

शैलेन्द्र जी यह पृथिवी अपने विविधवर्णी रंगों की ही बदौलत ही गुलजार है. यहाँ का जीवन भी अद्भुत रूप से सहकारी है. तकनीकी शब्दावली में इसे जैविक विविधता का नाम दिया जाता है. पशु-पक्षी से लेकर पेड़-पौधे तक सहकार का यह जीवन चलता रहता है. कवि शैलेन्द्र प्रकृति के इस नैकट्य को न केवल महसूस […]