शैलजा की डायरी

शैलजा को मैंने उनकी कविताओं के जरिये जाना. तभी शैलजा में एक बेहतर रचनाकार की एक संभावना दिखी थी. इधर फेसबुक पर उनकी डायरी के पन्ने मैं लगातार देखता रहा हूँ. जैसे इन पन्नों में भी एक नयी कविता रच रही हों वे. इन पन्नों में अतीत नास्टेल्जिक हो कर नहीं बल्कि रचनात्मक और सकारात्मक […]

शैलजा

किताबी सिद्धांतों और नियमों से इतर जीवन को महसूस करते हुए लिखी गयी कविता ही वास्तविक कविता होती है. उसमें कहीं कोई बनावट नहीं होती बल्कि  उसमें जीवन की सघन संवेदनाएं अनुस्यूत होती हैं. हिन्दी कविता अब इस बात पर गर्व कर सकती है कि उसमें समाज के अब तक उपेक्षित एवं शोषित तबके अपनी […]