हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ

हरीश चन्द्र पाण्डे आज सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि अपने-आप में एक मुकम्मल पता है. चुपचाप सृजनरत हरीश जी अपनी कविताओं में ऐसे अछूते विषयों को उठाते हैं जिससे गुजर कर लगता है अरे यह तो हमारे घर-परिवार या आस-पास का जीवन, समस्या या अनुभूति है. फिर हम उनकी कविताओं में अनायास ही बहते जाते […]

अमरकान्त जी पर शिवानन्द मिश्र का संस्मरण ‘आज भी लोग इलाहाबाद का ही मुँह देखते हैं!’

अमरकान्त जी हमारे लिए सिर्फ लेखक ही नहीं बल्कि हम सब के अभिभावक भी थे। हम सब उन्हें सम्मान और आत्मीयता से दादा कहते थे। वे हमसे उसी अधिकार से बातें भी करते थे जैसे घर का बुजुर्ग किया करता है। जब भी उनसे भेंट होती वे हमसे बलिया के बारे में जरुर पूछते। वे […]

शिवानन्द मिश्र की नववर्ष पर कविताएँ

  शिवानन्द मिश्र युवा कवि हैं। आज जब उनसे मेरा मिलना हुआ तो उन्होंने नव वर्ष पर लिखी गयी अपनी कुछ पंक्तियाँ सुनाई जिसके लिखने की शुरुआत उन्होंने वर्ष २००४ से किया था। तब से वे अनवरत नव वर्ष पर कुछ न कुछ लिखते रहे हैं। वर्ष २०१३ में शिवानन्द ने दो कविताएँ लिखी थीं। […]

कोरे यथार्थ से नहीं बनती कहानी

                                  बहुत दिनों बाद आज एक बार फिर ठेठ जनवादी तरीके से जलेस की गोष्ठी का आयोजन एक दिसंबर २०१३ को इलाहाबाद के नया कटरा के समया माई पार्क में किया गया। आयोजन में युवा कहानीकार शिवानन्द मिश्र ने अपनी कहानी ‘लौट आओ भईया’ का पाठ किया। इसके पश्चात् शहर के साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने […]

शिवानन्द मिश्र की कहानी

जिम्मेदारी महसूस करने की चीज होती है। जो इसे उठाता है वही इसके महत्व को जान-समझ सकता है। चाहें वो जिम्मेदारी घर-परिवार की हो या समाज की। शिवानन्द मिश्र एक नवोदित कहानीकार हैं और ‘लौट आओ भइया!’ इनकी पहली कहानी है। अपनी पहली ही कहानी में शिवानन्द ने यह परिचय दे दिया है कि  उनमें […]