उमा शंकर सिंह परमार का आलेख “अँधेरे समय में उजली उम्मीदों का कवि”

वीरेन डंगवाल विगत 28 सितम्बर को हम सबके प्यारे कवि वीरेन डंगवाल नहीं रहे। पांच अगस्त 1947 को शुरू हुआ उनके जीवन का सफर 28 सितम्बर को सुबह 4 बजे समाप्त हो गया। वीरेन दा न केवल एक बेहतर कवि थे बल्कि एक उम्दा इंसान भी थे। उनसे मिलने वाला कोई भी व्यक्ति सहज ही […]

पंकज पराशर का आलेख ‘गोया एक फ़रियाद है अज़ान-सी’

वीरेन डंगवाल वीरेन डंगवाल हमारे समय के अनूठे और अलग मिजाज के कवि हैं। उनका यह मिजाज आप सहज ही उनकी कविताओं में देख सकते हैं। भाषा का खिलंदडापन देखना हो तो आपको वीरेन की कविताओं के पास जाना होगा। आभिजात्य शब्दों को तो जैसे वे मुँह चिढाते हुए जन-सामान्य के बीच प्रचलित उन शब्दों […]