‘व्योमकेश दरवेश’ पर अरुणाकर पाण्डेय की समीक्षा ‘हमन को होसियारी क्या!’

हमारे समय के अनूठे और बेजोड़ लेखक-आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी को व्योमकेश दरवेश के लिए ‘व्यास सम्मान’ प्रदान किया गया है. आदरणीय विश्वनाथ जी को बधाई देते हुए हम प्रस्तुत कर रहे हैं इस किताब की एक समीक्षा, जिसे हमारे अनुरोध पर लिखा है मित्र कवि अरुणाकर पाण्डेय ने.   एक लेखक की ताकत का  इससे अंदाजा […]

शेखर जोशी: जन्म दिन विशेष – 8

अब तक आपने शेखर जोशी पर युवा मित्रों के आलेख पढ़े. शेखर जोशी जन्म दिन विशेष की आखिरी कड़ी में आज प्रस्तुत है विश्वनाथ त्रिपाठी का आलेख जो न केवल हमारे समय के वरिष्ठ आलोचक हैं अपितु वे शेखर जी के घनिष्ठ मित्रों में से एक हैं. यद्यपि यह आलेख २००३ में ही छप चुका […]