लाल बहादुर वर्मा का आलेख ‘जनतन्त्र और कुलीनता’।

लाल बहादुर वर्मा भारत दुनिया का सब से बड़ा जनतन्त्र है। जनतन्त्र की राह में सबसे बड़ा अवरोध होता है– ‘अभिजात्यता-बोध’। ‘अभिजात्यता-बोध’ का मतलब है बड़े होने का एक झूठा-बोध। एक आधार-रहित दंभ। यह दम्भ जातीय, नस्लीय, धार्मिक, विद्वता, धन-संपत्ति आदि से कुछ इस तरह निर्मित होता है, कि हमारे आत्म में गहरे तक पैठ […]

लाल बहादुर वर्मा का आलेख – ‘भूमंडलीकरण का सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’।

लाल बहादुर वर्मा भूमंडलीकरण अपेक्षाकृत एक आधुनिक टर्म है जिसने समूची दुनिया को कई अर्थों में सीमित कर दिया है। इस आधुनिकता ने एक तरफ जहाँ दुनिया को एकरूप बनाने में बड़ी भूमिका निभायी है वहीँ इसने कई दिक्कतें भी पैदा की हैं। कहना न होगा कि आज के ताकतवर और साम्राज्यवादी मानसिकता के देश […]

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा का आलेख ‘राहुल : जो भागा नहीं दुनिया को बदलने में लगा रहा’।

राहुल सांकृत्यायन एक व्यक्ति कितने आयामों वाला हो सकता है इसे समझने के लिए हमें राहुल सांकृत्यायन के पास जाना पड़ेगा। एक सचमुच का क्रान्तिकारी व्यक्तित्व जिसने अपने जीवन में ही असंभव को संभव कर दिखाया। एक ऐसा व्यक्ति जो लेखन के लिए आजीवन प्रतिबद्ध रहा। राहुल के इस विविध आयामी या कह लें हरफनमौला […]

लाल बहादुर वर्मा का आलेख – ‘इतिहास लेखन और दर्शन’।

लाल बहादुर वर्मा इतिहास अपने अतीत के यथार्थ को जानने का एक मात्र वस्तुनिष्ठ माध्यम है। ऐसे में इतिहास सही हो यह आवश्यक होता है। क्योंकि वह हमारे भविष्य की निर्मिति में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। इस क्रम में इतिहासकार को निर्मम होना पड़ता है। उसे तथ्यों का विवेचन करते समय खुद अपने, […]

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा का आलेख – ‘आओ अंबेडकर से प्यार करें’।

लाल बहादुर वर्मा प्रख्यात इतिहासकार प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा के आलेखों का एक सिलसिला हमने पहली बार पर पिछले दिनों आरम्भ किया था। इस कड़ी में दो आलेख पहले ही प्रस्तुत किये जा चुके हैं जिसे पाठकों के बीच अपार लोकप्रियता मिली। इसी कड़ी को आगे बढाते हुए हम प्रस्तुत कर रहे हैं प्रोफ़ेसर लाल […]

लाल बहादुर वर्मा का आलेख ‘प्रथम विश्व युद्ध जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।’

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा इसमें कोई दो राय नहीं कि मनुष्य इस धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। यह सर्वश्रेष्ठता उसने अपने ज्ञान और कौशल के चलते हासिल की है। आज दुनिया की जो तस्वीर पूरी तरह बदल गयी है उसके पीछे मनुष्य के ज्ञान- विज्ञान की ही बड़ी भूमिका है। लेकिन तस्वीर का एक दूसरा […]

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा का आलेख ‘जिंदगी है तो उम्मीद भी’।

स्टीफन हाकिंस के नाम से कौन परिचित नहीं होगा। दुनिया का यह सर्वश्रेष्ठ भौतिकविद अपने जीवट के दम पर आज जीते-जी ही एक किंवदंती बन चुका है। हाल ही में स्टीफन के जीवन पर एक बायोपिक फिल्म बनी है – ‘द थियरी ऑफ एव्रीथिंग’। इस असाधारण फिल्म को जेम्स मार्श ने निर्देशित किया है। फिल्म […]

लाल बहादुर वर्मा को प्रथम ‘शारदा देवी स्मृति सम्मान’

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने जीवन में ही संस्था बन जाते हैं। प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा एक ऐसी ही शख्सियत हैं जिन्हें किसी एक दायरे में बाँध कर नहीं देखा जा सकता। भले ही रोजी रोटी के लिए उन्होंने इतिहास के अध्ययन अध्यापन में अपना जीवन बिताया […]

अशोक आजमी की नयी कविता ‘लाल बहादुर वर्मा’

प्रोफ़ेसर लाल बहादुर वर्मा इन दिनों हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. चिकित्सकों के मुताबिक़ उनके ह्रदय की ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. इसके लिए उन्हें लखनऊ ले जाया गया है. हम सब उन्हें उनके जुझारूपन के लिए जानते रहे हैं. वे केवल एक शिक्षक ही नहीं बल्कि हम सब के लिए प्रेरणास्रोत, […]