रोहिणी अग्रवाल का आलेख ‘झोपड़पट्टी में धड़कती ज़िन्दगी और उलझती समस्याएं’

महानगरीय सभ्यता ने मानव सभ्यता के इतिहास में एक नयी अमानवीय संस्कृति को जन्म दिया जिसे हम ‘झोपड़पट्टी संस्कृति’ नाम से जानते हैं. रोजी-रोटी की तलाश में महानगर आए निम्नवर्गीय (आर्थिक) पृष्ठभूमि वाले लोगों का शरणगाह बनी ये झोपड़पट्टीयाँ आंसू, अभाव और हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद दो समय की रोटी के लिए उनकी जिल्लत भरी […]

रोहिणी अग्रवाल की किताब ‘हिन्दी कहानी : वक्त की शिनाख्त और सृजन का राग’ की भालचन्द्र जोशी द्वारा की गयी समीक्षा

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल हमारे समय की चर्चित एवं मुखर आलोचक हैं। उनकी आलोचना में स्पष्ट तौर पर एक वैचारिक प्रतिबद्धता देखी जा सकती है। हाल ही में रोहिणी जी की आलोचना की एक महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिन्दी कहानी : वक्त की शिनाख्त और सृजन का राग’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। इस किताब की […]

डॉ0 रोहिणी अग्रवाल का आलेख ‘चुप्पी में पगे शुभाशीष बनाम पचास साल का अंतराल और प्रेम को रौंदती आक्रामकता’

शेखर जोशी शेखर जोशी के जन्मदिन पर पिछले दिनों आपने उनकी उम्दा कहानी मेंटल पढ़ी। आज हम शेखर जी की कहानियों पर वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल का आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं। रोहिणी अग्रवाल ने अपने  इस आलेख में शेखर जी की चर्चित कहानी ‘कोसी का घटवार’ का एक तुलनात्मक अध्यययन किया है। इस आलेख […]

अर्चना वर्मा की कहानी पर रोहिणी अग्रवाल का आलेख

(चित्र: रोहिणी अग्रवाल) आलोचना उतनी आसान विधा नहीं जितना लोग समझते हैं और तुरत-फुरत लिखने के लिए आसन मार कर बैठ जाते हैं। आलोचना अपने आप में अत्यन्त कठिन कर्म है। रचना के समानान्तर उसका एक प्रति-पाठ तैयार करने की प्रक्रिया होती है आलोचना। आज के दौर में जिन कुछ गिने चुने आलोचकों ने इस […]