अजय कुमार पाण्डेय द्वारा संपादित कविता-संग्रह पर रामजी तिवारी की समीक्षा

बाल-साहित्य के बारे में प्रख्यात गीतकार और शायर गुलज़ार ने एक बार कहीं यह कहा था कि, ‘अच्‍छा बाल साहित्‍य वह है जिसका आनंद बच्‍चे से ले करबड़े तक ले सकें।’ बाल साहित्य की यह वह परिभाषा है जो उसे अब तलक बनाए गए खांचों से स्वतन्त्र करती है। हालांकि इस परिप्रेक्ष्य में लगभग दो […]

रामजी तिवारी का आलेख ‘अब्बास किआरोस्तमी….’

किआरोस्तमी ईरान को विश्व सिने पटल पर स्थापित करने वाले फिल्मकारों में अब्बास किआरोस्तमी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। ईरान जैसे देश में उपलब्ध कमतर स्पेस में भी उन्होंने ‘अपनी नई धारा’ का विकास कर अपने को साबित तो किया ही साथ ही यह भी सिखाया कि अगर आप में हुनर है […]

रामजी तिवारी की किताब ‘यह कठपुतली कौन नचावे’ पर आशुतोष की समीक्षा

             रामजी तिवारी ने आस्कर अवार्ड्स की एक सख्त पड़ताल की है अपनी किताब ‘यह कठपुतली कौन नचावै’ में. इस किताब की एक समीक्षा लिख भेजी है युवा आलोचक आशुतोष ने. तो आइए पढ़ते हैं यह समीक्षा.              कठपुतली ज़माने के विरूद्ध आशुतोष ‘आस्कर अवार्ड्स’ यह कठपुतली कौन नचावे रामजी तिवारी की पुस्तक बीबीसी हिंदी द्वारा […]

रामजी तिवारी की कविताएँ और उनके कविता संग्रह पर सोनी पाण्डेय की समीक्षा

रामजी तिवारी रामजी तिवारी का दखल प्रकाशन से हाल ही में पहला कविता संग्रह ‘अंधेरे समय का आदमी’ प्रकाशित हुआ है. इस संग्रह की एक समीक्षा की है युवा कवयित्री सोनी पाण्डेय ने. सोनी द्वारा लिखी गयी यह पहली समीक्षा है. समीक्षा के साथ-साथ इसी संग्रह से रामजी तिवारी की चुनिन्दा कविताएँ आपके लिए प्रस्तुत […]

रविशंकर उपाध्याय के कविता संग्रह ‘उम्मीद अब भी बाकी है’ की समीक्षा

                   रविशंकर उपाध्याय आज का हमारा समय भयावह द्वैधाताओं का समय है। राजनीति को रौशनी दिखाने वाले साहित्य की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं। ग़ालिब के शब्दों में कहें तो ‘आदमी को मयस्सर नहीं इंसा होना।’ आज की सबसे बड़ी दिक्कत आदमी बनने की ही है। ऐसे समय में एक युवा कवि ‘था’ जो सबसे […]

रामजी तिवारी की टिप्पणी ‘पुरुषोत्तम अग्रवाल’ की कहानियाँ पढ़ते हुए …….’

पुरुषोत्तम अग्रवाल एक सुधी आलोचक मौलिक रूप से खुद भी एक लेखक होता है। आलोचना में वह रचना के बरक्स एक कृति का ही सृजन करता है। यह परंपरा हमारे यहाँ काफी समृद्ध रही है। पुरुषोत्तम अग्रवाल का नाम इसी कडी में एक प्रमुख नाम है। अपनी आलोचना से पाठकों का दिल जीतने वाले पुरुषोत्तम […]

रामजी तिवारी

     फ़िल्में केवल हमारे  मनोरंजन का ही साधन नहीं होतीं बल्कि ये हमारे समय का एक बेहतरीन दस्तावेज भी होती हैं। एक विश्लेषक अपनी सूक्ष्म दृष्टि के द्वारा इन फिल्मों को देख कर उनकी वास्तविकता या दिखावे को समझ और समझा सकता है। वियतनाम युद्ध इतिहास का एक ऐसा ही अध्याय है जिस पर फिल्मकारों ने अनेक […]

रामजी तिवारी

रामजी तिवारी ने १९९७ में कुछ गीत लिखे थे. यह एक तरह से इनके रचनात्मक जीवन की शुरुआत थी. लेकिन बलिया जैसी जगह पर साहित्यिक माहौल न मिलने की वजह से लेखन का यह सफर थम सा गया. एक लंबे अंतराल के पश्चात २००९ से रामजी भाई ने लेखन की फिर से शुरुआत की. इस […]

रामजी तिवारी

बुखार हरीश बाबू की पहचान धुनों के पक्के आदमी की थी । अपने मित्रों के बीच वे इसी नाम से जानें जाते। हाँलाकि हरीश बाबू इन विशेषणों को बहुत महत्व नहीं देते और बड़ी सादगी से कहते – ‘‘ईश्वर ने हमें आदमी बनाया है और हमें वही रहना है न उससे अधिक और न उससे […]

रामजी तिवारी

रामजी तिवारी का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के तिवारी  छपरा गाँव में २ मई १९७१ को एक सामान्य किसान परिवार में हुआ. बलिया के ही सतीश  चन्द्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय से रामजी  ने राजनीतिशास्त्र में परास्नातक  किया. आजकल भारतीय जीवन बीमा निगम की बलिया शाखा में कार्यरत हैं. कुछ कवितायेँ ‘पाखी’, ‘परिकथा’, ‘कृति ओर’ और समकालीन सोच में छपी है.कहीं भी प्रकाशित  होने वाली यह इनकी  पहली कहानी है.संपर्क-  भारतीय जीवन बीमा निगम, बलिया, उत्तर प्रदेश.मोबाइल- 09450546312 ई-मेल: ramji.tiwari71@gmail.com blog : http://www.sitabdiyara.blogspot.com/ Mobile- 09450546312 कहानी पीठा जेठ में सिर्फ दो दिन बचे हैं और इन्हीं में से किसी एक दिन पीठा चढ़ाना है। कल या परसो। सुंदरी देवी परेशान हैं। सोचती हैं, अपने पति की […]