राजेश जोशी की पुस्तकं ‘किस्सा कोताह’ की पल्लव द्वारा समीक्षा

राजेश जोशी जितने उम्दा कवि हैं उतने ही उम्दा गद्यकार. उनकी गपोड़ी की डायरी से तो आप सब परिचित ही होंगे. राजेश जी की ये सारी गप्पें (जो विशुद्ध गप्प भी नहीं है) अब एक किताब ‘किस्सा कोताह’ के रूप में आ गयी है, इस किताब की एक समीक्षा लिखी है युवा आलोचक पल्लव ने. […]

राजेश जोशी

नाम में क्या धरा है चेहरे याद रहते हैं और आजकल लोगों के नाम मैं अक्सर भूल जाता हूँ वह जो कुछ देर पहले ही मिला बहुत तपाक से और बातें करता रहा देर तक पच जाता है दिमाग पर उसका नाम याद नहीं आता मन ही मन अपने को समझाता हूँ कि इसमें कुछ […]