कमलजीत चौधरी के कविता संग्रह पर रश्मि भारद्वाज की समीक्षा ‘‘भूख और कलम अब भी मेरे पास है’ : भाषा का सौम्य औज़ार लिए अपने समय से जूझती कविताएँ।

रश्मि भारद्वाज अपनी प्रारम्भिक कविताओं से ही ध्यान आकर्षित करने वाले युवा कवि कमलजीत चौधरी का पहला कविता संग्रह दखल प्रकाशन से छप कर आया है – ‘हिन्दी का नमक।’ इधर के छपे कविता संग्रहों में यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कमलजीत ने अपने इस पहले संग्रह में ही अपनी भाषा और शिल्प को […]

रश्मि भारद्वाज की रपट ‘मन के घेराव से निकल कर ही संभव है रचना-कर्म!’

महेश चन्द्र पुनेठा पिछले वर्ष पिथौरागढ़ में ‘लोकविमर्श शिविर-1’ का आयोजन कवि महेश चन्द्र पुनेठा के आतिथ्य में देवलथल गाँव में सम्पन्न हुआ था। आज महेश चन्द्र पुनेठा का जन्मदिन है। वे न सिर्फ एक उम्दा कवि और आलोचक हैं बल्कि एक बेहतर इंसान भी हैं। जो भी इस ‘लोकविमर्श शिविर’ में शामिल हुआ वह […]

विजेन्द्र जी की किताब ‘आधी रात के रंग’ पर रश्मि भारद्वाज की समीक्षा

विजेन्द्र जी पाब्लो पिकासो ने कभी कहा था कि ‘कुछ पेंटर सूरज को एक पीले धब्बे में बदल देते हैं जबकि अन्य पेंटर एक पीले धब्बे को सूरज में।’ यानी कला जितनी आसान दिखती है वह अपने में उतनी ही मुश्किल होती है। लेकिन कवि जो वस्तुतः एक कलाकार ही होता है इस मर्म को […]

रश्मि भारद्वाज की कविताएँ

रश्मि भारद्वाज जन्मस्थान– मुजफ्फरपुर, बिहार शिक्षा –अँग्रेजी साहित्य से एम.फिल पत्रकारिता में डिप्लोमा वर्तमान में पी-एच.डी. शोध (अँग्रेजी साहित्य) दैनिक जागरण, आज आदि प्रमुख समाचार पत्रों में रिपोर्टर और सब-एडिटर के तौर पर कार्य का चार वर्षों का अनुभव, वर्तमान में अध्यापन और स्वतंत्र लेखन। (उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी द्वारा अधीनस्थ विश्वेश्वरया कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर […]