रमाशंकर सिंह का आलेख ‘उत्तर प्रदेश के घुमन्तू समुदायों की भाषा और उसकी विश्व-दृष्टि’

रमाशंकर सिंह घुमन्तू जातियाँ जो आमतौर पर मानव के प्रचेनतम रूप को अभिव्यक्त करती हैं, मनुष्यता की धरोहर हैं। इनकी अपनी एक पुष्ट संस्कृति और भाषा होती है। आधुनिकता की मार से ये जातियां सर्वाधिक प्रभावित हुईं हैं। और प्रभावित हुई है इनकी संस्कृति और भाषा भी। तुर्रा यह कि दुनिया की तथाकथित सभ्य जातियों […]

रमाशंकर सिंह की कविताएँ

रमाशंकर सिंह आत्मवृत्त के नाम पर कुछ खास नहीं है सिवाय इसके कि गोण्डा जिले के एक छोटे से गांव में जन्म। अन्न उपजाने वाले पिता के कारण भूखे तो कभी नहीं रहे, लेकिन गरीबी और लाचारी को बहुत गहरे तक महसूस किया है। पहली कविता साकेत कालेज की पत्रिका साकेत ‘सुधा’ में 2002 में […]

हितेन्द्र पटेल के उपन्यास ‘चिरकुट’ पर रमाशंकर की समीक्षा

किसी भी रचनाकार के लिए इतिहास बोध का होना जरुरी होता है। और जब यह लेखन खुद एक इतिहासकार द्वारा किया जाय तो उसमें इतिहास-बोध स्वाभाविक रूप से आता है। हरबंस मुखिया, लाल बहादुर वर्मा और बद्रीनारायण के साथ-साथ हितेन्द्र पटेल भी एक ऐसा ही सुपरिचित नाम है जो इतिहास के साथ-साथ साहित्य में भी […]