रमाकान्त द्विवेदी ‘रमता’

थाती में आज प्रस्तुत है जन कवि रमाकान्त द्विवेदी ‘रमता जी’ की दो कविताएं. जो अन्ना आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में समीचीन हैं.     रमाकान्त  द्विवेदी  ‘रमता’ हमनी साथी हईं हमनी देशवा के नया रचवइया हई जा. हमनी साथी हईं, आपस में भईया हईं  जा हमनी हई जा जवान,  राहे  चली सीना तान  हमनी जुलुमिन से पंजा लड़वईया हईं जा  सगरे हमनी के दल, गाँव नगर हलचल  हमनी  चुन चुन कुचाल मेटवइया हईं जा  झंडा हमनी के लाल  तीनो काल में कमाल  सारे  झंडा  ऊपर  झंडा उड़वइया   […]