नरेन्द्र मोहन की आत्मकथा पर योगिता यादव की समीक्षा चुप्पियों की आवाज है ‘कमबख्त निंदर’

नरेन्द्र मोहन किसी भी रचनाकार के लिए आत्मकथा लिखना एक कठिन कार्य होता है। आत्मकथा जो अपनी तो हो लेकिन दूसरों की संवेदनाओं और अनुभूतियों से कहीं न कहीं जुड़े। महज वैयक्तिक हो कर ही न रह जाए। वरिष्ठ कवि, नाटककार और आलोचक के रूप में सुविख्यात डॉ. नरेंद्र मोहन ने इधर अपनी आत्मकथा लिखी है। […]

योगिता यादव की कहानी ‘झीनी झीनी बिनी रे चदरिया’

योगिता यादव युवा लेखिका योगिता यादव को हाल ही में “कलमकार पुरस्‍कार” से सम्‍मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार उनकी नयी कहानी “झीनी-झीनी बिनी रे चदरिया” के लिए दिया गया। कहानी में चादर एक ऐसा बिम्ब है जिसे अपने शिल्प के बल पर योगिता ने अनूठा स्वरुप दे दिया है और उसके हवाले से ही […]

योगिता यादव की कहानी क्लीन चिट

साम्प्रदायिक दंगे अपने साथ तमाम मुसीबतें ले कर आते हैं। इसकी सबसे अधिक मार स्त्रियाँ सहती हैं। १९८४ के सिक्ख दंगे इसकी मिसाल हैं। इसी को आधार बना कर योगिता ने क्लीनचिट कहानी लिखी है जो दंगे के बाद के मुसीबतों को करीने से हमारे सामने रखती है। कहानी की नायिका दरअसल सिमरन कौर की […]

योगिता यादव

योगिता का जन्म दिल्ली में १९८१ में हुआ। बचपन दिल्ली में ही बिता।     योगिता में हिन्दी साहित्य और राजनीति शास्त्र से परास्नातक किया है। विगत ग्यारह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय। आजकल जम्मू में दैनिक जागरण के लिए पत्रकारिता। योगिता कविता और कहानियां दोनों विधाओं में लिखती हैं। हंस, नया ज्ञानोदय, प्रगतिशील वसुधा, पर्वत राग, […]