कमाल सुरेया की कविता (अनुवाद- यादवेन्द्र पाण्डेय)

कमाल सुरेया स्त्रियों की स्थिति इस पूरी दुनिया में लगभग एक जैसी है. उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हर देश काल परिस्थिति में होता आ रहा है. कमाल सुरेया की कविता को पढ़ कर कुछ ऐसा ही लगता है.  ‘एक दिन स्त्री चल देती है चुपचाप दबे पाँव’ कविता की आख़िरी पंक्तियाँ तो जैसे […]

दारियो फ़ो की मृत्यु पर उनके कलाकार लेखक पुत्र जकोपो फ़ो का वक्तव्य (अनुवाद : यादवेन्द्र)

दारियो फ़ो 1997 के साहित्य नोबेल पुरस्कार विजेता महान इतालवी नाटककार और वामपंथी सांस्कृतिक ऐक्टिविस्ट दारियो फ़ो का इटली के मिलान में 13 अक्टूबर 2016 को निधन हो गया। जीवन की विसंगतियों पर वे जिस तरह से व्यंग्य करते थे वह अपने आप में बेजोड़ होता था। दारियो फ़ो ने चालीस से ज्यादा नाटक लिखे […]

एमोस ओज की हिब्रू कहानी ‘प्रतीक्षा’ (अनुवाद – यादवेन्द्र पाण्डेय)

एमोस ओज   1939 में येरुशलम में जन्मे  एमोस ओज आज के इस्राइल (या यूँ कहने कि हिब्रू भाषा ) के सर्वाधिक चर्चित साहित्यिक हस्ताक्षर हैं जिन्होंने कहानियाँ ,उपन्यास और संस्मरणों के अतिरिक्त प्रचुर मात्रा में सम सामयिक राजनैतिक लेखन किया है। अपना खानदानी नाम “क्लौस्नर” से बदल कर उन्होंने “ओज” रख लिया जिसका शाब्दिक अर्थ होता है शक्ति। […]