सिंजू पी. वि. का आलेख ‘कहानीकार मार्कण्डेय : किसानों एवं खेतिहर मज़दूरों के तरफदार’

मार्कण्डेय जी भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह जुमला हम बचपन से ही सुनते आए हैं। आज भी यदा-कदा इस जुमले को दोहराया जाता है। यह सच्चाई है कि कृषि में औद्योगीकरण और सेवा क्षेत्र से अधिक लोग आज भी लगे हुए हैं। यह अलग बात है कि किसानों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती […]

हिमांगी त्रिपाठी का आलेख ‘सेमल के फूल : एक असमाप्त प्रेम कथा’

मार्कण्डेय जी मार्कण्डेय जी की ख्याति आम तौर पर एक कहानीकार की है लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि उन्होंने हिन्दी साहित्य की अधिकतर विधाओं में अपने हाथ आजमाए और वे इसमें प्रायः सफल भी रहे। अपनी रचनाधर्मिता के शुरुआती दिनों में मार्कण्डेय जी ने एक लम्बी कहानी लिखी ‘सेमल के फूल’। हालांकि […]

चंचल चौहान का आलेख ‘मार्कण्डेय की कहानी कला’

मार्कण्डेय जी आज मार्कण्डेय जी के निधन को छः वर्ष पूरे हो गए। एक समय में इलाहाबाद में मार्कण्डेय जी का होना मेरे लिए एक पूरी आश्वस्ति हुआ करता था। ‘कथा’ से मेरे जुड़ने के बाद यह आश्वस्ति धीरे-धीरे ऐसे रिश्ते में तब्दील हो गयी जिसे नाम देने में दुनिया की कोई भी भाषा समर्थ […]

मार्कण्डेय जी का आलेख ‘नई कहानी की उपलब्धियाँ’

  मार्कण्डेय जी मार्कण्डेय जी अगर आज हम सबके बीच होते तो उम्र का 85 वां वर्ष पूरे कर रहे होते। बहुत कम लोग इस बात से परिचित हैं कि वे एक सशक्त कहानीकार के साथ-साथ एक बेहतर आलोचक भी थे। नयी कहानी की उपलब्धियों के बहाने उन्होंने कहानी और उसकी आलोचना पर अनेक महत्वपूर्ण […]

नीलिमा पाण्डेय का आलेख ‘मार्कण्डेय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व’

मार्कण्डेय जी नयी कहानी आन्दोलन के पुरोधाओं में से एक मार्कण्डेय का व्यक्तित्व बहुआयामी था। एक बेहतर कहानीकार होने के साथ-साथ वे एक बेहतर व्यक्तित्व के मालिक भी थे। उनकी विनम्रता के हम सब कायल थे। जो भी उन्हें जानते हैं इस बात से परिचित होंगे कि अंतिम समय तक वे किसी भी आगंतुक की […]

मार्कण्डेय जी के कुछ दुर्लभ फोटोग्राफ्स

आज मार्कण्डेय जी की पांचवीं पुण्यतिथि है. इस अवसर पर प्रस्तुत है एक फोटो फीचर. मार्कण्डेय जी के जीवन के विभिन्न पलों को इन फोटोग्राफ्स में समेटने का यत्न किया गया है. इन बहुमूल्य और दुर्लभ चित्रों को हमें उपलब्ध कराया डॉ. स्वस्ति ठाकुर ने, जो मार्कण्डेय जी की बड़ी पुत्री हैं.       […]

जयपाल सिंह प्रजापति का आलेख ‘एक ‘अग्निबीज़’ इनमें भी है’

  मार्कण्डेय जी आम आदमी खासकर एक गरीब आदमी की पीड़ा और उसकी जलालत भरी जिन्दगी मार्कण्डेय जी की रचनाओं में हमें सहज ही दिख जाती है। इन सबके दिलों में एक गहरा आक्रोश और असंतुष्टि है। मार्कण्डेय की रचनाओं के इस पहलू पर नजर डाली है जयपाल प्रजापति ने। कल 18 मार्च को मार्कण्डेय […]

मार्कण्डेय जी की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान पर हिमांगी त्रिपाठी का आलेख

मार्कण्डेय जी की पुण्यतिथि 18 मार्च के अवसर पर विशेष प्रस्तुति के क्रम में हमने वरिष्ठ आलोचक अमीर चंद वैश्य का समीक्षा-आलेख प्रस्तुत किया था. इसी प्रस्तुति के दूसरे क्रम में पेश है हिमांगी त्रिपाठी का आलेख ‘मार्कण्डेय जी की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान एवं समय सन्दर्भ’ मार्कण्डेय की कहानियों में बाल-मनोविज्ञान एवं समय सन्दर्भ   […]

मार्कण्डेय जी के कविता संग्रह ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’ की समीक्षा

मार्कण्डेय न केवल एक कहानीकार थे बल्कि एक सक्षम कवि भी थे. अभी पिछले ही वर्ष मार्कण्डेय जी का एक कविता संकलन ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’ आया है. इस संग्रह पर एक समीक्षा लिखी है वरिष्ठ आलोचक अमीर चंद वैश्य ने. मार्कण्डेय जी की पुण्यतिथि (18 मार्च) के अवसर पर हम यह विशेष प्रस्तुति […]

मार्कण्डेय

किसी भी रचनाकार के लिए अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बात करना बहुत आसान नहीं होता. समय का एक-एक रेशा चुपके से किसी भी लेखक के लेखकीय व्यक्तित्व की निर्मित्ति में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता चला जाता है. और इसी धरातल पर वह वितान निर्मित होता है जिसे हम रचनाकार के नाम से जानते […]