महेश चंद्र पुनेठा का आलेख ‘शिक्षा और मनोविज्ञान की भी गहरी समझ रखते थे मुक्तिबोध’

मुक्तिबोध अपने एक वक्तव्य के दौरान एक दफे नामवर सिंह ने कहा था – ‘जो युग जितना ही आत्म-सजग होता है उसके मूल्यांकन का काम उतना ही कठिन हो जाता है।’ इस वक्तव्य में युग की जगह अगर रचनाकार कर दिया जाए तो मुक्तिबोध के मूल्यांकन के संदर्भ में यह एक सर्वथा उपयुक्त वक्तव्य होगा। […]

रश्मि भारद्वाज की रपट ‘मन के घेराव से निकल कर ही संभव है रचना-कर्म!’

महेश चन्द्र पुनेठा पिछले वर्ष पिथौरागढ़ में ‘लोकविमर्श शिविर-1’ का आयोजन कवि महेश चन्द्र पुनेठा के आतिथ्य में देवलथल गाँव में सम्पन्न हुआ था। आज महेश चन्द्र पुनेठा का जन्मदिन है। वे न सिर्फ एक उम्दा कवि और आलोचक हैं बल्कि एक बेहतर इंसान भी हैं। जो भी इस ‘लोकविमर्श शिविर’ में शामिल हुआ वह […]

उमाशंकर सिंह परमार का आलेख ‘“बुझे चिराग जलाओ, बहुत अँधेरा है”

महेश चन्द्र पुनेठा युवा कवियों में महेश चन्द्र पुनेठा अपनी अलग तरह के कहन और व्यंजना के लिए जाने जाते हैं। वे कुछ उन दुर्लभ कवियों में से हैं जिनके व्यवहार और सिद्धान्त में आपको कोई फांक नहीं दिखायी पड़ेगी। उनकी कविताएँ पढ़ते हुए हम यह बराबर महसूस भी करते हैं। महेश की कविताओं पर […]

महेश चन्द्र पुनेठा की कविताएँ

महेश चन्द्र पुनेठा कविता लिखने के क्रम में हर कवि के मन में यह सवाल जरुर उठता है कि वह कविता क्यों लिख रहा है? कविता के इस अभिप्राय को ले कर तमाम कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। और यह सिलसिला आज भी जारी है। युवा कवि महेश पुनेठा भी इस सवाल से टकराते हैं। […]

निर्मला तोंदी के कविता संग्रह ‘अच्छा लगता है’ पर महेश चन्द्र पुनेठा की समीक्षा

 निर्मला तोंदी इधर की उन चुनिन्दा कवियित्रियों में से हैं जिन्होंने आज की कविता की दुनिया में अपनी एक सुपरिचित पहचान बना ली है. हाल ही में निर्मला का एक नया कविता संग्रह आया है- ‘अच्छा लगता है’. इस संग्रह की एक पड़ताल की है युवा कवि-आलोचक महेश पुनेठा ने. तो आइए पढ़ते हैं निर्मला […]

महेश चन्द्र पुनेठा के संग्रह ‘भय अतल में’ पर विजय गौड़ की समीक्षा

महेश चन्द्र पुनेठा का पहला कविता संग्रह ‘भय अतल में’ काफी चर्चित रहा था. इस संग्रह की कविताओं की ख़ास बात यह थी कि महेश ने अत्यंत सामान्य लगने वाली घटनाओं और व्यक्तित्वों को अपनी कविता का विषय बनाया। पहाड़ के साथ-साथ उनका एक शिक्षक और आम आदमी का वह संवेदनशील सा मन भी इन […]

युवा कवि केशव तिवारी से महेश चन्द्र पुनेठा की बातचीत

लोक और जनपदीय कविता के प्रमुख हस्ताक्षर केशव तिवारी से अभी हाल ही के दिनों में एक बातचीत की युवा कवि महेश चन्द्र पुनेठा ने। इस बातचीत के प्रसंग में कई महत्वपूर्ण बातें उभर कर सामने आयीं हैं। इन्हें जानने के लिए आइये पढ़ते हैं यह बातचीत। युवा कवि केशव तिवारी मेरे उन गिने-चुने मित्रों […]

युवा कविता पर वरिष्ठ आलोचक डॉ0 जीवन सिंह से बातचीत

(फोटो: जीवन सिंह) आरा से निकलने वाली पत्रिका ‘जनपथ’ का अभी-अभी कविता विशेषांक आया है। इस विशेषांक में युवा कवि महेश चन्द्र पुनेठा ने वरिष्ठ आलोचक जीवन सिंह का एक साक्षात्कार लिया है। इस साक्षात्कार को हम ज्यों का त्यों आप सब के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।   1-महेश चंद्र पुनेठाः हिंदी युवा कविता के […]

महेश चंद्र पुनेठा

हिन्दी दिवस के अवसर पर हमारे कवि मित्र महेश चन्द्र पुनेठा ने यह विचारपूर्ण आलेख पहली बार के लिए लिखा है. महेश जी एक बेहतर शिक्षक भी हैं और शिक्षा के वास्तविक सरोकारों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए ‘शैक्षिक दखल’ नाम से एक गंभीर और सुरुचिपूर्ण पत्रिका भी निकालते हैं.  महेश ने […]

महेश चंद्र पुनेठा

लॉन्ग नाईन्टीज और कविता के सन्दर्भ में चल रही बहस के क्रम में अभी तक आप पढ़ चुके हैं विजेन्द्र, अमीर चन्द्र वैश्य और आग्नेय के आलेख। इसी कड़ी में प्रस्तुत है इस बार युवा कवि और आलोचक महेश चन्द्र पुनेठा का आलेख-   सीमित जीवनानुभव के कवि-आलोचकों द्वारा फैलाया गया भ्रम                               काव्य में […]