भालचन्द्र जोशी के कहानी संग्रह ‘जल में धूप’ पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की समीक्षा

आज तरह-तरह के विमर्श हैं और उन विमर्शों पर कविताएँ और कहानियाँ लिखना फैशन में है। लेकिन कुछ रचनाकार ऐसे भी हैं जो इस फैशनेबल परिपाटी से दूर रह कर अपनी रचनाधर्मिता में लगातार लगे हुए हैं। ऐसे रचनाकारों की रचनाओं में अनुभव की ताप दिखाई पड़ती है। ऐसे रचनाकारों की रचनाएँ पाठकों को सहज […]