भालचन्द्र जोशी की कहानी ‘पिशाच’

भाल चन्द्र जोशी भारत आज भी एक कृषि प्रधान देश है। देश की अर्थव्यवस्था आज भी बहुत हद तक खेती किसानी पर अवलम्बित है। लेकिन उदारवाद और पूँजीवाद ने किसानों को दिनोंदिन दिवालिया बनाने का ही काम किया है। समाज में आज भी सामंत और साहूकार हैं जो किसानों की लाचारी का फायदा उठाने से […]

रोहिणी अग्रवाल की किताब ‘हिन्दी कहानी : वक्त की शिनाख्त और सृजन का राग’ की भालचन्द्र जोशी द्वारा की गयी समीक्षा

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल हमारे समय की चर्चित एवं मुखर आलोचक हैं। उनकी आलोचना में स्पष्ट तौर पर एक वैचारिक प्रतिबद्धता देखी जा सकती है। हाल ही में रोहिणी जी की आलोचना की एक महत्वपूर्ण पुस्तक ‘हिन्दी कहानी : वक्त की शिनाख्त और सृजन का राग’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। इस किताब की […]

भालचन्द्र जोशी के कहानी संग्रह ‘जल में धूप’ पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की समीक्षा

आज तरह-तरह के विमर्श हैं और उन विमर्शों पर कविताएँ और कहानियाँ लिखना फैशन में है। लेकिन कुछ रचनाकार ऐसे भी हैं जो इस फैशनेबल परिपाटी से दूर रह कर अपनी रचनाधर्मिता में लगातार लगे हुए हैं। ऐसे रचनाकारों की रचनाओं में अनुभव की ताप दिखाई पड़ती है। ऐसे रचनाकारों की रचनाएँ पाठकों को सहज […]

वन्दना शुक्ल के कहानी संग्रह ‘उड़ानों के सारांश’ और कैलाश वानखेड़े के संग्रह ‘सत्यापन’ पर भालचन्द्र जोशी की समीक्षा।

  इधर दो युवा कहानीकारों के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह आये हैं। पहला संग्रह है वन्दना शुक्ल का ‘उड़ानों के सारांश’ जबकि दूसरा संग्रह है ‘सत्यापन’ जिसके कहानीकार हैं कैलाश वानखेड़े। यह संयोग मात्र नहीं कि ये दोनों कहानीकार हमारे समाज के उन वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सदियों से  दमन और उत्पीडन का सामना […]

लेखक की गरिमा और पुरस्कार की प्रतिष्ठा का प्रश्न

(संदर्भ: लमही सम्मान) भालचन्द्र जोशीअभी हाल ही में लमही सम्मान को ले कर साहित्य जगत में काफी बावेला खड़ा हुआ था। फेसबुक पर इसको ले कर तमाम बातें और बहसें हुईं। कुछ समय बाद यद्यपि यह बावेला ठंडा पड़ गया लेकिन इस मसले ने लेखकीय गरिमा जैसे महत्वपूर्ण सवाल को हमारे सामने उठा दिया। इस पूरे […]

भालचन्द्र जोशी

भालचंद्र जोशी हमारे समय के सुपरिचित कहानीकार हैं। भाल चन्द्र जी ने अपनी कहानियों में उन साहसिक विषयों को उठाने का जोखिम मोल लिया है जिससे आमतौर पर कहानीकार बचते रहे हैं। ‘चरसा’ इनकी ऐसी ही एक कहानी है जिसमें अछूत  जाति के युवक किशन ने अपने ही गाँव की ब्राहमण युवती सविता से प्रेम […]