भरत प्रसाद की लम्बी कविता

भरत प्रसाद कट्टरतावाद आज अपने नए रंग-रूप में हमारे सामने है। उसकी चाहतें आज भी अपना वर्चस्व कायम करने की ही हैं। इराक हो या फिर अफगानिस्तान, कोई भी देश या समाज उसकी हवस का शिकार बन सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल वह देश बर्बाद होता है बल्कि वहाँ का जनजीवन बुरी […]

भरत प्रसाद की कविताएँ

भरत प्रसाद ‘आदमी होने के तमाम ऋण होने’ को बिरले ही पहचान पाते हैं। भरत प्रसाद ऐसे संवेदनशील युवा कवि हैं जिन्होंने अपने इस दायित्व को पहचाना है। शायद यही वह भाव है जिससे यह कवि साहसपूर्ण ढंग से यह कह पाया है कि ‘उठ गया है यकीन, अपने ही फैसलों से/ नफ़रत हो उठती […]

भरत प्रसाद की सुरेश सेन निशान्त से बातचीत

सुरेश सेन निशान्त कविता के क्षेत्र में आज अनेक महत्वपूर्ण कवि सक्रिय हैं। सुरेश सेन निशांत ऐसे ही कवि हैं जो सुदूर हिमाचल के पर्वतीय अंचल में रहते हुए भी लगातार सृजनरत हैं। उनकी कविताएँ चोंचलेबाजी से दूर उस सामान्य जन की कविताएँ हैं जो लगातार हाशिये पर रहा है। निशान्त में उस हाशिये को […]

भरत प्रसाद का आलेख ‘कविता के देश का नवजागरण’

हिन्दी कविता में इस समय एक साथ अनेक युवा कवि बेहतर काम कर रहे हैं। अछूते विषयों को अपनी कविता का विषय बनाने के साथ-साथ वे अपने नए बिम्ब भी गढ़ रहे हैं। आज जरुरत है इन नए कवियों पर बेबाकी से बात करने की, जिससे कि हम हिन्दी कविता के वर्तमान परिदृश्य को वैश्विक […]

भरत प्रसाद के काव्य संग्रह ‘एक पेड़ की आत्म कथा की समीक्षा : नित्यानन्द गायेन

कवि एवं आलोचक भरत प्रसाद का एक कविता संग्रह ‘एक पेड़ की आत्मकथा’ नाम से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह की समीक्षा की है युवा कवि नित्यानन्द गायेन ने। आईए पढ़ते हैं यह समीक्षा-    ‘पेड़ के बहाने, मनुष्य की आत्मकथा’ पिछले दिनों कवि भरत प्रसाद जी का काव्य संग्रह ‘एक पेड़ की आत्मकथा’ पढ़ने […]

भरत प्रसाद

नरेश सक्सेना हमारे समय के अत्यन्त महत्वपूर्ण कवियों में शुमार किये जाते है। मात्र दो संग्रहों के बल पर नरेश जी ने जो ख्याति अर्जित की है वह उल्लेखनीय है। नरेश जी के कवि कर्म पर एक आलोचनात्मक पड़ताल की है युवा कवि – आलोचक भारत प्रसाद ने।    वैज्ञानिक भावुकता के शिल्पकार विषयों की […]

भरत प्रसाद

भरत प्रसाद ने आलोचना के साथ-साथ कविताएँ और कुछ कहानियां भी लिखीं हैं. ‘का गुरू’ भरत की एक नवीनतम व्यंग्परक कहानी है जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त दुराचारों को अपनी कहानी का विषय बनाया है. भरत खुद भी पूर्वोत्तर विश्वविद्यालय शिलांग में हिन्दी के एक प्रोफ़ेसर हैं और वे इस बुद्धिजीवी समुदाय […]

भरत प्रसाद

शेक्सपियर चित्र- शेक्सपियर, (गूगल से साभार)   काल और प्रेम (अनुवादक – नगेन्द्र) वज्र धातु हो या प्रस्तर हो या दुर्दम सागर, .ये हैं नतसिर सभी सामने क्रूर काल के . तो कैसे वह रूप सहेगा उस प्रहार को ?जिसका लघु अस्तित्व फूल सा मृदु -कोमल है. मधु-वासंती वात आह, कैसे झेलेगी ? बर्फीली ऋतुवों […]

भरत प्रसाद

भरत प्रसाद का जन्म उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले के हरपुर नामक गाँव में २५ जनवरी १९७० को हुआ. इन्होने १९९४ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी ए किया. फिर जे एन यू से हिंदी साहित्य में एम ए किया. जे एन यू से ही ‘भूरी भूरी खाक धूल (काव्य संग्रह) में मुक्तिबोध की युग […]