प्रतुल जोशी का आलेख ‘मृत्यु का अभिवादन’।

यह एक शाश्वत सत्य है कि हर जीवधारी की अन्तिम परिणति मृत्यु है। जीवन की शर्तों में मृत्यु अनिवार्य रूप से शामिल होती है। चुकि इसमें हमेशा हमेशा के लिए बिछड़ने का भाव होता है इसलिए यह दुखद होती है। लेकिन अब जब विज्ञान ने जीवन की अनेकानेक गुत्थियों को सुलझा दिया है कुछ तर्कवादी […]

प्रतुल जोशी का आलेख ‘कुछ जगबीती, कुछ आप बीती : “प्रतिरोध का सिनेमा” के दस वर्ष’

बालीवुड के बौद्धिक दिवालियेपन से निराश लोगों के लिए उम्मीद की किरण है – ‘प्रतिरोध का सिनेमा’। संजय जोशी ने ‘प्रतिरोध के सिनेमा’ की शुरुआत एक सामाजिक-सांस्कृतिक के रूप में की थी जो अब एक आन्दोलन का रूप ले चुकी है। गोरखपुर में सन् 2006 से छोटी सी शुरुआत करने वाले उनके ग्रुप को भी […]

प्रतुल जोशी की कहानी

प्रतुल जोशी किसी भी समाज के चलने के अपने नियम और अपने कायदा-क़ानून हुआ करते हैं। लेकिन जिन्दगी अलबेली होती है। वह तो अपने ही तरीके से ही चलना पसन्द करती है। प्रतुल जोशी ने ज़िंदगी के इस अलबेले तरीके को जानने-समझने की कोशिश की है इस कहानी में। तो आइए पढ़ते हैं प्रतुल जोशी […]

प्रतुल जोशी की कविताएँ

प्रतुल जोशी अपनों का साथ हमेशा सुखद होता है। लेकिन जीवन तो वही होता है जो गतिमय होता है। इंसान भी इस गति को बनाए रख कर अपने को जीवंत बनाये रखता है। लेकिन यहाँ भी एक दिक्कत यह आती है कि जैसे ही वह कहीं दूसरी जगह जाता है, अपने को प्रवासी महसूस करने […]

प्रतुल जोशी का आलेख ‘यादें लूकरगंज की’

 (सौ, लूकर गंज के उस घर का एक दृश्य जिसमें शेखर जोशी रहा करते थे)  इलाहाबाद अपने साहित्यिक परिवेश के लिए ख्यात रहा है। इसके तमाम मुहल्लों में एक से बढ़ कर एक नामचीन हस्तियाँ आसानी से देखने को मिल जाती थीं। हम खुद रामस्वरुप चतुर्वेदी, लक्ष्मीकान्त वर्मा, केशव चन्द्र वर्मा, रघुवंश, मार्कंडेय, अमरकान्त, शेखर […]

अमरकान्त जी पर प्रतुल जोशी का संस्मरण

विगत 17 फरवरी को प्रख्यात कथाकार और हम सब के दादा अमरकान्त जी नहीं रहे. यह हम  सब के लिए एक गहरी क्षति थी. प्रतुल जोशी ने अपने संस्मरण में अमरकान्त जी के साथ बिठाये गए पलों को ताजा किया है. आईए पढ़ते हैं प्रतुल जोशी का यह संस्मरण  हमारे ताऊ जी “अमरकांत जी”: स्मृति […]

प्रतुल जोशी

आज का जमाना बहुत बदल गया है. अभी तक हमारे दिलो-दिमाग में घरों की जो अवधारणा थी अब वह बदल रही है. अब घर का मतलब फ़्लैट से लिया जाने लगा है. पहले टेलीविजन और मोबाईल ने हमें एकाकी बनाया अब फ़्लैट हमें समेटने लगा है, बकौल नरेश सक्सेना, उस अवधारणा में ‘जिसकी कोई जमीन […]

प्रतुल जोशी

पोनुंग पार्टी अभी सो रही है पोनुंग पार्टीबेख़बर, अलमस्त,प्रातः की इस नव बेला मेंजब सूरज अपनी ज़िम्मेदारी निभाताउठ जाता है बहुत सबेरेयहां देश के इस भू-भाग में(जिसका नामसूर्य के ही एक पर्यायवाची के नाम पररख दिया थाकिसी ने वर्षों पहले)रात भर रही होंगीनृत्य में मशगूलवर्ष के यह चार दिनआते हैंइन सबके हिस्सेजब कोई नहीं कहताकि […]

प्रतुल जोशी

  प्रतुल जोशी का जन्म इलाहाबाद में २२ मार्च १९६२ को हुआ. पिता शेखर जोशी एवम  माँ   चन्द्रकला जी के सानिध्य में प्रतुल को बचपन से  ही साहित्यिक  परिवेश  मिला.   इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९८४ में अर्थशास्त्र से परास्नातक.पिछले २३ वर्षों से आकाशवाणी से जुड़ाव.वर्त्तमान में आकाशवाणी लखनऊ में कार्यकम अधिशाषी.रेडियो के लिए बहुत से नाटकों का लेखन.वहीं बहुत सारे रेडियोफीचर्स का निर्माण.समय समय पर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में संस्मरण,व्यंग्य,यात्रा-वृतांत,कविता के रूप में योगदान. एक यात्रा पोनुंग के नाम मै […]