प्रणय कृष्ण का यह आलेख : ‘एक खुली किताब है राजेन्द्र कुमार का जीवन’

इलाहाबाद की पहचान एक लम्बे अरसे से भारत की साहित्यिक राजधानी के रूप में रही है. इस पहचान को बनाने में यहाँ के उन साहित्यकारों की विशिष्ट भूमिका रही है जिन्होंने अपने जीवन में प्रतिबद्धता बनाए रखी. प्रोफ़ेसर राजेन्द्र कुमार उनमें से एक हैं. प्रोफ़ेसर राजेन्द्र कुमार के जीवन पर एक नजर डाली है प्रणय […]

प्रणय कृष्ण का आलेख ‘तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन पुनरुज्जीवित होंगे’

इतिहास गवाह है है कि जब कभी कहीं तानाशाही प्रवित्तियाँ हावी हुईं हैं तब-तब कलम को रोकने की कोशिश की गयी है। हमारे यहाँ हतप्रभ करने वाला एक वाकया ऐसा ही हुआ जब तमिलनाडु के मशहूर उपन्यासकार पेरूमल मुरुगन ने लिखा कि ‘लेखक पेरूमल मुरुगन मर गया।‘  आखिर ऐसे हालात क्यों उपजे जिसके चलते मुरुगन […]

प्रणय कृष्ण: मार्कण्डेय: स्मरण में है आज जीवन

मार्कन्डेय जी लेखक होने के साथ साथ एक बेहतर इंसान भी थे. अपने समीप आने वाले किसी भी व्यक्ति से मार्कन्डेय जी जिस सहजता से मिलते और आव-भगत करते थे वह आमतौर पर इतनी बड़ी कद-काठी के लेखकों के जीवन व्यवहार में प्रायः नदारद मिलता है. नयी पीढ़ी से वे हमेशा अत्यंत उत्साह से मिलते […]

प्रणय कृष्ण

(भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन पर प्रणय कृष्ण की लेखमाला की आख़िरी किस्त) प्रणय कृष्ण यह जनता की जीत है It is not enough to be electors only. It is necessary to be law-makers; otherwise those who can be law-makers will be the masters of those who can only be electors.” -Dr.Ambedkar ( “महज मतदाता होना पर्याप्त नहीं […]

प्रणय कृष्ण

प्रणय कृष्ण अन्ना,अरुंधती एवं देश      (पेश है, अन्ना हजारे की अगुवाई में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन पर अभी चल रही बहस को समेटता यह प्रणय कृष्ण के लेखमाला की यह दूसरी किस्त) आज अन्ना के अनशन का आठवाँ दिन है. उनकी तबियत बिगड़ी है. प्रधानमंत्री का ख़त अन्ना को पहुंचा है. अब वे जन लोकपाल […]

प्रणय कृष्ण

प्रणय  कृष्ण   आज की आलोचना के मुख्य स्वर प्रणय कृष्ण का  जन्म  इलाहाबाद में २० नवंबर 1965 को हुआ था.  इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम ए करने के पश्चात् इन्होंने जे  एन यू से  एम फिल किया. १९९३-१९९४ में जे  एन यू छात्र संघ के अध्यक्ष बने. २००७ में प्रणय  ने अपना शोध  कार्य पूरा किया जो ‘उत्तर औपनिवेशिकता  के श्रोत’ नाम से  प्रकाशित और  चर्चित हो चुकी है. इनकी एक और  पुस्तक ‘अज्ञेय का काव्य: प्रेम और मृत्यु’  २००५ में प्रकाशित हो चुकी है. आजकल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एसोसिएट  प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत  हैं साथ ही वैचारिक पत्रिका  समकालीन जनमत का संपादन और लेखक संगठन जसम के […]