पाश

  अनुवाद- यादवेन्द्र शर्मा अब मैं विदा होता हूँ अब मैं विदा होता हूँ मेरी दोस्त!मैं अब विदा होता हूँमैंने एक कविता लिखनी चाही थी तूं  जिसे सारी गुनगुनाती रहती उस कविता में महकते हुए धनिए का जिक्र होना था.गन्नों की सरसराहट का जिक्र होना था.और कोंपलों की नाजुक शोखी का जिक्र होना था उस कविता […]

‘पाश’

अवतार सिंह ‘पाश’  (गूगल के सौजन्य से)  मैं अब विदा लेता हूँ मैं अब विदा लेता हूँ , मेरी दोस्त ,मैं अब    विदा लेता हूँ मैने एक कविता लिखनी चाही थी , सारी उम्र जिसे तुम पढती रह सकती ,प्यार करना … और लड़ सकना जीने पे ईमान ले आना मेरी दोस्त यही होता है ,धूप की तरह […]