पल्लव की किताब ‘कहानी का लोकतन्त्र’ पर रेणु व्यास की समीक्षा

आमतौर पर हिन्दी कहानी के क्षेत्र में आलोचना की स्थिति बेहतर नहीं रही है। यह सुखद है कि इन दिनों कुछ युवा आलोचक इस क्षेत्र में तन्मयता से अपना काम कर रहे हैं। इन युवा आलोचकों में पल्लव का नाम महत्वपूर्ण है। कहानी आलोचना पर पल्लव की एक किताब हाल ही में प्रकाशित हुई है- […]

राजेश जोशी की पुस्तकं ‘किस्सा कोताह’ की पल्लव द्वारा समीक्षा

राजेश जोशी जितने उम्दा कवि हैं उतने ही उम्दा गद्यकार. उनकी गपोड़ी की डायरी से तो आप सब परिचित ही होंगे. राजेश जी की ये सारी गप्पें (जो विशुद्ध गप्प भी नहीं है) अब एक किताब ‘किस्सा कोताह’ के रूप में आ गयी है, इस किताब की एक समीक्षा लिखी है युवा आलोचक पल्लव ने. […]