पंकज पराशर का आलेख ‘गोया एक फ़रियाद है अज़ान-सी’

वीरेन डंगवाल वीरेन डंगवाल हमारे समय के अनूठे और अलग मिजाज के कवि हैं। उनका यह मिजाज आप सहज ही उनकी कविताओं में देख सकते हैं। भाषा का खिलंदडापन देखना हो तो आपको वीरेन की कविताओं के पास जाना होगा। आभिजात्य शब्दों को तो जैसे वे मुँह चिढाते हुए जन-सामान्य के बीच प्रचलित उन शब्दों […]

पंकज पराशर की दस कविताएँ

पंकज पराशर इस समय के युवा आलोचकों में पंकज पराशर अपना काम चुपचाप लेकिन बखूबी कर रहे हैं. बेहतर आलोचक होने के साथ-साथ पंकज एक संवेदनशील कवि भी हैं. कवि जो आस-पास की घटनाओं को गौर से देखता ही नहीं, शिद्दत से अपने अन्दर महसूस करता है. कई बार अपने को ठगा महसूस करता है […]

भारत यायावर की किताब पर पंकज पराशर की समीक्षा

हिन्दी आलोचना के जीवित किंवदंती बन चुके नामवर सिंह के जीवन पर भारत यायावर की हाल ही में एक किताब आई है – ‘नामवर होने का अर्थ’. इस किताब की एक आलोचकीय पड़ताल की है. युवा कवि-आलोचक मित्र पंकज पराशर ने. आइए पढ़ते हैं पंकज की यह समीक्षा.    मुझमें ढल कर बोल रहे जो वे […]

पंकज पराशर

हमारे समय के कुछ युवा आलोचकों ने समकालीन कहानी पर बेहतर काम किया है। युवा आलोचकों में पंकज पराशर एक ऐसा ही नाम है जिन्होंने शिद्दत से इस काम को शुरू किया है। इसी क्रम में पंकज ने हमारे समय की चर्चित कहानीकार अल्पना मिश्र की कहानी ‘स्याही में सुरखाब के पंख’ पर यह विस्तृत […]

पंकज पराशर

  (नरेश सक्सेना) नरेश सक्सेना हमारे समय के ऐसे कवि हैं जिन्होंने अत्यंत कम लिख कर भी कविता के परिदृश्य में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है। उनका पहला संग्रह ‘समुद्र पर हो रही है बारिश’ काफी चर्चा में रहा था। अभी-अभी भारतीय ज्ञानपीठ से उनका दूसरा कविता संग्रह ‘सुनो चारुशीला’ प्रकाशित हुआ है। इस […]