अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख ‘दूसरी परंपरा की खोज’ : इनकाउंटर

नामवर सिंह इसमें कोई दो राय नहीं कि नामवर सिंह हमारे समय के श्रेष्ठ आलोचक हैं. लेकिन ऐसा भी नहीं, कि केवल इसी बिना पर  उनकी आलोचना न की जा सके. युवा कवि-आलोचक अमरेन्द्र कुमार शर्मा ने ‘वाह-वाह’ या ‘अहो-अहो’ की परम्परा से अलग हट कर उनकी महत्वपूर्ण किताब ‘दूसरी परम्परा की खोज’ का इनकाउंटर […]

भारत यायावर की किताब पर पंकज पराशर की समीक्षा

हिन्दी आलोचना के जीवित किंवदंती बन चुके नामवर सिंह के जीवन पर भारत यायावर की हाल ही में एक किताब आई है – ‘नामवर होने का अर्थ’. इस किताब की एक आलोचकीय पड़ताल की है. युवा कवि-आलोचक मित्र पंकज पराशर ने. आइए पढ़ते हैं पंकज की यह समीक्षा.    मुझमें ढल कर बोल रहे जो वे […]