कवि नरेश सक्सेना पर युवा आलोचक नलिन रंजन सिंह का आलेख ‘सुनो चारुशीला: जैसे कविता को लय मिल गई हो’

  नरेश सक्सेना नरेश सक्सेना हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं। विज्ञान या कह लें कि अभियांत्रिकी से जुड़े होने का प्रभाव उनकी कविता में स्पष्ट परिलक्षित होता है लेकिन यह प्रभाव कोई कृत्रिमता नहीं पैदा करता अपितु प्रकृति के साथ जुडाव को और पुख्ता ही करता है। नरेश सक्सेना के कविता संग्रह ‘सुनो चारुशीला’ […]