देवेन्द्र आर्य का आलेख ‘हिन्दी ग़ज़ल आलोचना की दिक्कतें’

देवेन्द्र आर्य गज़ल ख़ुद में एक अलहदा और महत्वपूर्ण विधा है। मूलतः फ़ारसी से शुरू हुई इस विधा ने उर्दू से होते हुए हिन्दी तक का एक लम्बा सफ़र तय किया है। मशहूर गीतकार एवं कवि देवेन्द्र आर्य ने हिन्दी ग़ज़ल की दिक्कतों के मद्देनजर यह सारगर्भित आलेख लिखा है। देवेन्द्र आर्य का यह आलेख […]

देवेन्द्र आर्य की कविताएँ

देवेन्द्र आर्य आज का समय जब इतना एकांगी हो चला है कि हम अपने सारे रिश्ते-नाते भूलते जा रहे हैं ऐसे समय में हमारा यह कवि इन रिश्तों की बात एक अलग परिप्रेक्ष्य में करता है। रिश्ते भी ऐसे ही नहीं बन जाते। उनके भी अलग-अलग मौसम होते हैं और यह मौसम ही तय करता […]

देवेन्द्र आर्य

                                                                     (देवेन्द्र आर्य ) देवेन्द्र आर्य का जन्म १९५७ में गोरखपुर में हुआ. गोरखपुर विश्विद्यालय से ही देवेन्द्र ने इतिहास में एम. ए. किया अब तक इनके तीन गीत संग्रह ‘खिलाफ जुल्म के, ‘धूप सिर चढ़ने लगी’ और ‘सुबह भीगी रेत पर’, तीन गज़ल संग्रह ‘किताब के बाहर’, ख्वाब-ख्वाब खामोशी’ और ‘उमस’ और एक […]