दिनकर कुमार की कविताएँ

एकबारगी सब कुछ बदल गया है अपने यहाँ. रियल स्टेट का आतंक. आवारा पूँजी की रक्तरंजित अभिलाषा. धन पिशाचों की अनन्त महत्वाकांक्षाएँ अपने इर्द-गिर्द इस तरह मंडरा रही हैं जिससे यह झूठा लगने लगा है कि भारत गाँवों का देश है. राजनीति अब सेवा नहीं लूट-खसोट का जरिया बन गयी है. लोकतन्त्र जिस पर हम […]