तेजेंदर लूथरा

इकहरापन यहाँ से आगे नहीं जा पाऊँगा मैं,यहाँ सोच भी कुंद है,और मान्यताओं की गुफा भी बंद. यहाँ से आगे मुझे रोशनी भी नज़र नहीं आती,और यहाँ से आगे जाना,व्यवहारिक भी नहीं होगा. मुझ मे ताकत ही नहीं बची है,या मुझे बचपन से ही,ठीक से चलना नहीं सिखाया गया है,कसूर किसका है,बहस बेकार है. अब […]