तुषार धवल की कविताएँ

तुषार धवल जिन्दगी के चलने का ढर्रा बेतरतीब होता है। अपनी बेतरतीबी में ही यह वह तरतीब रचती है जिसे कवि, चित्रकार और समाज विज्ञानी अपनी-अपनी तरह से उकेरने का प्रयास आजीवन करते रहते हैं। एक अर्थ में कलाकार जो ललित रचनाओं से जुड़े होते हैं समाज के सजग पहरेदार होते हैं। अपनी रचनाओं के द्वारा […]