जितेन्द्र कुमार की कविताएँँ

कवि की दृष्टि और सोच व्यापक होती है। शायद इसीलिए कवि के बारे में यह उपमा गढ़ी गयी होगी कि ‘जहाँ न पहुंचे कवि, वहाँ पहुंचे रवि।’ हमारे आज के कवि जितेन्द्र कुमार ने अपनी सूक्ष्म दृष्टि से अपने आसपास को देखा है जिसमें गाँव की अंगूठा टेक औरतें हैं, दीपा मुर्मू हैं, घर है […]

जीतेन्द्र कुमार की कहानी ‘जकड़न’

जातिवादी जकडन से घिरे प्यारे लाल चौबे खेती कराने का जब उपक्रम करते हैं तो उनके सामने एक-एक कर तमाम समस्याएं आती हैं। इस कहानी के माध्यम से जीतेन्द्र कुमार न केवल जातिवादी जकड़न बल्कि कृषिगत जकड़नों की भी बात करते हैं। आधुनिकता की मार झेल रहा किसान किन द्वंदों से गुजर रहा है इसकी […]