जयनन्दन की यह कहानी “लोकतंत्र की पैकिंग”

हमारे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ने आजादी के बाद के भारत में जिस लोकतन्त्र का सपना देखा था उसमें प्रमुख रूप से यह भाव समाहित था कि सबको आर्थिक सुरक्षा मिले। सभी को जीने के लिए आधारभूत चीजें मुहैया हो। भारत की मिट्टी में पले-बढे कबीर ने भी कभी सोचा था ‘सांई इतना दीजिए, जामे कुटुम […]

जयनंदन की कहानी

संक्षिप्त परिचय जन्म- 26 फरवरी, 1956 नवादा (बिहार) के मिलकी गांव में।शिक्षा    – एम. ए. (हिन्दी) कृतियां- अब तक कुल इक्कीस पुस्तकें प्रकाशित। ‘श्रम एव जयते’, ‘ऐसी नगरिया में केहि विधि रहना’, ‘सल्तनत को सुनो गांववालो’ (उपन्यास), ‘सन्नाटा भंग’, ‘विश्व बाजार का ऊंट’, ‘एक अकेले गान्ही जी’, ‘कस्तूरी पहचानो वत्स’, ‘दाल नहीं गलेगी अब’, ‘घर […]