कैलाश वानखेड़े की कहानी ‘उस मोड़ पर’

प्रेम एक ऐसा अहसास है जो हमें आह्लादित कर देता है। जो हमें जीने की ऊष्मा प्रदान करता है। लेकिन इस प्रेम के आड़े आते हैं मनुष्य द्वारा खींची गयी वे संकीर्ण रेखाएं जो किसी भी प्रकार से तर्कसंगत नहीं कही जा सकती। प्रेम तो वह आतिश है जो इन संकीर्ण रेखाओं को जला कर […]

वन्दना शुक्ल के कहानी संग्रह ‘उड़ानों के सारांश’ और कैलाश वानखेड़े के संग्रह ‘सत्यापन’ पर भालचन्द्र जोशी की समीक्षा।

  इधर दो युवा कहानीकारों के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह आये हैं। पहला संग्रह है वन्दना शुक्ल का ‘उड़ानों के सारांश’ जबकि दूसरा संग्रह है ‘सत्यापन’ जिसके कहानीकार हैं कैलाश वानखेड़े। यह संयोग मात्र नहीं कि ये दोनों कहानीकार हमारे समाज के उन वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सदियों से  दमन और उत्पीडन का सामना […]