कैलाश बनवासी की कहानी ‘गुरु-ग्रन्थि’।

कैलाश बनवासी प्रगतिशीलता का दिखावा करने वाले लोग भी अक्सर रुढ़िवादी और अन्धविश्वासी होते हैं। ऐसे लोग अपनी प्रगतिशीलता की आड़ में अपने पिछड़ेपन को छुपाये रहते हैं। समाज में ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं। कहानीकार कैलाश बनवासी ने अपनी इस कहानी ‘गुरु ग्रंथि’ में इसी विषय को आधार बनाया है। कहानी अपनी प्रवहमानता […]

कैलाश बनवासी के उपन्यास ‘लौटना नहीं है’ पर विनोद तिवारी की समीक्षा ‘समाज का बंद घेरा बहुत मजबूत होता है’

कैलाश बनवासी कैलाश बनवासी का एक महत्वपूर्ण उपन्यास आया है ‘लौटना नहीं है। यह उपन्यास इस मायने में अहम् है कि आज के निम्नमध्यम वर्गीय स्त्री जीवन की पड़ताल करने के साथ-साथ इन स्त्रियों में अपने जीवन के प्रति आयी चेतना को भी बखूबी सामने रखा है। जिस पल उपन्यास की नायिका गौरी यह निश्चय […]

कैलाश बनवासी की कहानी ‘बस के खेल और चार्ली चैप्लिन’

कैलाश बनवासी निश्चित रूप से आज के दौर हम तकनीकी रूप से सबसे अधिक समृद्ध हैं। सोशल मीडिया पर अत्यन्त सक्रिय भी। लेकिन यह भी एक कड़वी हकीकत है कि हम संवेदना के स्तर पर लगातार पिछड़ते चले जा रहे हैं। मुझे तो इस बात का डर है कि आगे के दिनों में संवेदना महज […]

कैलाश बनवासी की कहानी – ‘लव-जिहाद’ लाइव’

      कैलाश बनवासी  जाति-धर्म के ठेकेदारों के लिए हमेशा अपने हित ही सर्वोपरि होते हैं। अपने हितों के लिए ये ठेकेदार जाति और धरम को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करते हैं।  दुर्भाग्यवश सत्ता भी आज यही काम करने लगी है।  ऐसा ही एक नया टर्म इन दिनों सामने आया है ‘लव जिहाद’। उत्तेजक कहानियाँ गढ़ […]

सामयिक प्रकाशन से अभी प्रकाशित हो रहे कैलाश बनवासी के उपन्यास ‘लौटना नहीं है’ का एक अंश

कैलाश बनवासी अपनी कहानियों के लिए हिन्दी में पहले से ही ख्यात रहे हैं. अभी हाल ही में कैलाश ने अपना एक महत्वपूर्ण उपन्यास पूरा किया है.  ध्यातव्य है कि कैलाश बनवासी का यह पहला उपन्यास है. ‘लौटना नहीं है’  नामक यह उपन्यास सामयिक प्रकाशन से छप कर आने ही वाला है. प्रस्तुत है इसी […]

कैलाश बनवासी

        जन्म- 10 मार्च 1965, दुर्ग शिक्षा- बी0एस-सी0(गणित),एम0ए0(अँग्रेजी साहित्य) 1984 के आसपास लिखना शुरू किया। आरंभ में बच्चों और किशोरों के लिए लेखन। कृतियाँ- सत्तर से भी अधिक कहानियाँ देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। बहुतेरी कहानियाँ चर्चित,किंतु कहानी ‘बाजार में रामधन’ सर्वाधिक चर्चित। अब तक तीन कहानी संग्रह प्रकाशित-‘लक्ष्य तथा अन्य कहानियाँ’(1993),‘बाजार में […]