उमाशंकर सिंह परमार का आलेख “मैं मोम हूँ मुझे छूकर नहीं देखा”

कैलाश गौतम कैलाश गौतम का नाम आते ही उनकी वह बेलौस हँसी याद आती है जो पूरी तरह निश्छल हुआ करती थी। इस मामले में हम खुशनसीब हैं कि हमने गौतम जी की वह हँसी अपने आँखों देखी थी। निराला के शब्दों में कहें तो उनकी ‘वह हँसी बहुत कुछ कहती थी‘। कैलाश गौतम वस्तुतः […]