केशव तिवारी के संग्रह ‘तो काहे का मैं’ उमाशंकर सिंह परमार की समीक्षा

हिन्दी कविता में केशव तिवारी अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। केशव न केवल अपनी अपनी भाषा और शिल्प के तौर पर बल्कि अपने कहन के तौर पर भी औरों से अलग से नजर आते हैं। हाल ही में उनका तीसरा संग्रह ‘तो काहे का मैं’ इलाहाबाद के साहित्य भण्डार प्रकाशन से छप कर […]

युवा कवि केशव तिवारी से महेश चन्द्र पुनेठा की बातचीत

लोक और जनपदीय कविता के प्रमुख हस्ताक्षर केशव तिवारी से अभी हाल ही के दिनों में एक बातचीत की युवा कवि महेश चन्द्र पुनेठा ने। इस बातचीत के प्रसंग में कई महत्वपूर्ण बातें उभर कर सामने आयीं हैं। इन्हें जानने के लिए आइये पढ़ते हैं यह बातचीत। युवा कवि केशव तिवारी मेरे उन गिने-चुने मित्रों […]

केशव तिवारी

लोक धर्मी कविताओं की जब भी बात आती है केशव तिवारी का नाम जरूरी तौर पर लिया जाता है. केदार नाथ अग्रवाल की जमीन बांदा में रहते हुए केशव ने कविता की जो जोत जला रखी है उसका प्रकाश अब दूर दराज तलक दिखाई पडने लगा है. केशव के अब तक दो कविता संग्रह ‘इस […]