केदार नाथ सिंह के संग्रह ‘सृष्टि पर पहरा’ की आशीष मिश्र द्वारा की गयी समीक्षा

केदार नाथ सिंह  केदार नाथ सिंह का हाल ही में एक नया कविता संग्रह आया है ‘सृष्टि पर पहरा’। इसमें केदार जी अपने पूरे काव्य-रौ में दिखाई पड़ते हैं। अपने आस-पास की चीजों को ले कर ही उसे एक मिथकीय रूप दे देना जैसे केदार जी के कवि को भाता रहा है। यह संग्रह पिछले […]

केदारनाथ सिंह पर विमलेश त्रिपाठी का आलेख ‘केदारनाथ सिंह का जीवन और सृजन-संघर्ष’

पिछले दिनों वरिष्ठ कवि केदार नाथ सिंह को 49 वाँ ज्ञानपीठ सम्मान देने की घोषणा की गयी. कहना न होगा कि केदार जी हिन्दी के महत्वपूर्ण कवियों में से एक हैं. राजधानी दिल्ली में रहते हुए भी गंवई जीवन से उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है. बातचीत में भी भोजपुरी बोलने के लिए हम […]

केदार नाथ सिंह

मेरी भाषा के लोग                                                                                                                                  मेरी सड़क के लोग हैं सड़क के लोग सारी दुनिया के लोग पिछली रात मैंने एक सपना देखा कि दुनिया के सारे लोग  एक बस में बैठे हैं  और हिंदी बोल रहे हैं फिर वह पीली-सी बस  हवा में गायब हो गई और मेरे पास बच गयी  सिर्फ मेरी हिंदी  जो अंतिम सिक्के की तरह  हमेशा बच जाती है मेरे पास  हर मुश्किल में  कहती वह  कुछ नहीं पर बिना   कहे भी जानती है मेरी जीभ  कि उसकी  खाल पर चोटों के कितने निशान हैं कि […]