श्रीराम त्रिपाठी का केदारनाथ अग्रवाल पर केन्द्रित आलेख ‘सोच-समझ कर ही गढ़ते हैं’

वरिष्ठ आलोचक श्रीराम त्रिपाठी का आज जन्मदिन है. इस अवसर पर उनके दीर्घायु और सतत रचनाशील रहने की कामना करते हुए हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं उन्हीं का लिखा एक आलेख जो जन कवि केदार नाथ अग्रवाल पर केन्द्रित है. तो आइए पढ़ते हैं यह आलेख      सोच-समझ […]

श्रीराम त्रिपाठी का आलेख ‘कृषक-कृषक का गुणन’

आलोचना एक दुष्कर कर्म है. आम तौर पर लोग आलोचना का मतलब उखाड़-पछाड़ या रचना की पंक्तिबद्ध व्याख्या से लगा लेते हैं जबकि इन सबसे इतर आलोचना रचना के ही समानान्तर उस का एक पुनर्पाठ करती है. रचना के समानान्तर खड़ी हो कर उससे बोलती-बतियाती है और  उसे फिर से अपने तईं पुनर्रचित करती है. […]