उमा शंकर चौधरी की कहानी ‘दिल्ली में नींद’

आज हम मानव सभ्यता के जिस तथाकथित शिखर पर खड़े हैं उसमें सचमुच की कितनी जगह मानवता के लिए बची हुई है। ऐसा लगता है जैसे इसमें सामान्य मनुष्य के लिए कोई जगह ही नहीं। आज सब कुछ उनके लिए है जो सामर्थ्यवान है। आम आदमी जैसे घुट-घुट कर मरने के लिए अभिशप्त है। जीना […]

उमा शंकर चौधरी की कहानी ‘कहीं कुछ हुआ है, इसकी खबर किसी को न थी’

आज के कहानीकारों में उमा शंकर चौधरी अपने कथक्कड़ी के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं. हमारे रोजमर्रा के जीवन और घटनाक्रम से कथ्य खोज कर उस के माध्यम से एक नयी कहानी बुन देना उमा शंकर की खासियत है. इस कहानी के माध्यम से भी उमा शंकर ने बाजार और उपभोक्तावाद के हमारे […]

उमा शंकर चौधरी

एक मार्च उन्नीस सौ अठहत्तर को खगड़िया बिहार में जन्म। कविता और कहानी लेखन में समान रूप से सक्रिय। पहला कविता संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’(2009) भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित। इसी कविता संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’ पर साहित्य अकादमी का पहला युवा सम्मान (2012)। इसके अतिरिक्त कविता के […]

उमा शंकर चौधरी

  युवा  कवि  उमाशंकर चौधरी को साहित्य  एकेडेमी  का  ‘पहला  युवा  सम्मान २०१२’ भुवनेश्वर में २५ अगस्त २०१२ को एकेडेमी के  अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय के हाथों  प्रदान किया  जाएगा. उमाशंकर को इस सम्मान के लिए ‘पहली बार’ की और से बधाई. इस अवसर पर हम उमाशंकर की कुछ ताजातरीन कवितायें प्रस्तुत कर रहे हैं. […]