अर्चना वर्मा की कहानी पर रोहिणी अग्रवाल का आलेख

(चित्र: रोहिणी अग्रवाल) आलोचना उतनी आसान विधा नहीं जितना लोग समझते हैं और तुरत-फुरत लिखने के लिए आसन मार कर बैठ जाते हैं। आलोचना अपने आप में अत्यन्त कठिन कर्म है। रचना के समानान्तर उसका एक प्रति-पाठ तैयार करने की प्रक्रिया होती है आलोचना। आज के दौर में जिन कुछ गिने चुने आलोचकों ने इस […]