अरुण माहेश्वरी

(चित्रः गूगल के सौजन्य से) अज्ञेय शताब्दी समारोहों के बहाने सात मार्च 1911 को जन्मे अज्ञेय जी का शताब्दी वर्ष पूरा हो गया। हिंदी जगत में उनके लिये श्रद्धा-सुमनों की कोई कमी नहीं रही। अलग-अलग शहरों में कई आयोजन हुए। अखबारों, पत्रिकाओं में कुछ छोटी-मोटी टिप्पणियां आयीं। उनके निकट के मित्रों, संबंधियों ने एक-दो किताबें […]

अरुण माहेश्वरी

अकेलों की नयी दुनिया ‘टाईम’ पत्रिका के ताजा अंक (12 मार्च 2012) में ऐसी दस बातों का ब्यौरा दिया गया है जो “आपकी जिंदगी को बदल रही है”।  इनमें पहली बात है – अकेले जीना। परिवार परम्परा के बाहर ऐसा एकाकी जीवन जिसमें किसी संतति का स्थान नहीं होता। अमेरिका समेत विभिन्न विकसित देशों के […]

अरुण माहेश्वरी

रवीन्द्रनाथ की आध्यात्म-आधारित विश्व-दृष्टि यह रवीन्द्रनाथ के जन्म का 150वां वर्ष है। सांस्कृतिक रूप में सजग भारत के किसी भी व्यक्ति को रवीन्द्रनाथ ने आकर्षित न किया हो, ऐसा संभव नहीं है। ऊपर से, यदि आप बंगाल के निवासी है तो रवीन्द्रनाथ की उपस्थिति का अहसास निश्चत तौर पर आप पर बना ही रहेगा। रवीन्द्रनाथ […]

अरुण माहेश्वरी

भारतीय वामपंथ के समक्ष कुछ जरूरी मुद्दे: वामपंथ के पुनर्गठन का एक प्रस्ताव {“आत्मालोचना क्रियात्मक और निर्मम होनी चाहिए क्योंकि उसकी प्रभावकारिता परिशुद्ध रूप में उसके दयाहीन होने में ही निहित है। यथार्थ में ऐसा हुआ है कि आत्मालोचना और कुछ नहीं केवल सुंदर भाषणों और अर्थहीन घोषणाओं के लिए एक अवसर प्रदान करती है। […]