अमीर चन्द वैश्य का आलेख ‘सूखे में बादल और वर्षा के बिम्ब’

कवि त्रिलोचन प्रकृति में मानव के बढ़ते हस्तक्षेप के दुष्परिणाम अब स्पष्ट तौर पर दिखायी पड़ने लगे हैं। बारिश जब होनी चाहिए तब नहीं होती। होती भी है तो बस नाम की। किसान आसमान निहारते रह जाते हैं। जब हम उम्मीद नहीं करते तब लगातार बारिश होती है। बादल भी जैसे हमसे आँख मिचौली करते […]

विजेन्द्र की कविता ‘ओ एशिया’ पर अमीर चन्द वैश्य का आलेख

यह विडम्बना ही है कि दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप होने के बावजूद एशिया एक लम्बे समय से साम्राज्यवादी शक्तियों के उत्पीड़न का शिकार रहा है। पहले यूरोपीय शक्तियों ने एशिया के देशों को गुलाम बना कर शोषण किया और अब अमरीका अपने निहित स्वार्थों के चलते एशिया के ही विभिन्न हिस्सों कभी ईराक, कभी […]

अच्युतानन्द मिश्र के कविता संग्रह ‘आँख में तिनका’ की समीक्षा

अच्युतानन्द मिश्र हिन्दी के उन महत्वपूर्ण युवा कवियों में से एक हैं जिनका पहला कविता संग्रह ‘आँख में तिनका’ चर्चित रहा है। यह संग्रह हमें काफी-कुछ आश्वस्त करता है।  इस संग्रह की समीक्षा लिखी है वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द वैश्य ने। तो आईये पढ़ते हैं यह समीक्षा।  प्रतिबद्ध कवि का मनोरम रचना – संसार अमीर […]

कठफूला बाँस: करुणा और प्रतिरोध का सौन्दर्य

विजेन्द्र जी की लम्बी एक कविता है ‘कठफूला बाँस।’ यह कविता श्रीराम तिवारी की पत्रिका ‘पक्ष’ में १९७७ ई में छपी थी। अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण इस कविता की तरफ आलोचकों का लम्बे अरसे तक ध्यान नहीं गया। तिवारी जी ने अपनी सम्पादकीय टिप्पणी में लिखा था – ‘इस कविता से एक मुकम्मिल रचनात्मक स्थिति […]

अमीर चन्द वैश्य

पहली बार पर वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द्र वैश्य हर महीने एक कृति की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी क्रम में इस बार प्रस्तुत है आलोचक भरत प्रसाद की आलोचना पुस्तक ‘सृजन की इक्कीसवीं सदी।’  वैश्वानरी चिन्तन एवं चिन्ताएँ     मेरे सामने एक महत्वपूर्ण पुस्तक है ‘सृजन की 21 वीं सदी’.  लेखक हैं उदीयमान कवि-कहानीकार […]

अमीर चन्द वैश्य

आज बीस अगस्त को कवि त्रिलोचन का जन्म दिन है। त्रिलोचन जी ने हिन्दी में सॉनेट लिखने की परम्परा की शुरुआत की। त्रिलोचन के इस सॉनेट विधा पर वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द जी ने एक आलेख लिखा है जो पहली बार के पाठकों के लिए त्रिलोचन के जन्मदिन पर विशेष रूप से प्रस्तुत है।     […]