अमीर चन्द वैश्य

‘लांग नाईंटीज‘ जैसे नवगढ़ित टर्म पर हो रहे हो-हल्ले के बीच ‘पहली बार‘ पर हमने विजेंद्र जी के आलेख के साथ कविता पर बहस की एक शुरुआत की थी. उसी कड़ी में आज प्रस्तुत है वरिष्ठ आलोचक अमीर चन्द वैश्य का यह आलेख, जिसमें अमीर जी ने कविता की लोकधर्मी परम्परा पर शिद्दत से विचार […]

अमीर चंद्र वैश्य

अपने गाँव धरमपुर में कवि विजेंद्र समकालीन हिन्दी कविता में लोकधर्मी कवियों में विजेंद्र का नाम अग्रगण्य है. अब तक उनके १८ काव्य संकलनों, २ काव्य नाटकों के अलावा २ चिंतन प्रधान पुस्तकें एवं ३ डायरियां प्रकाश में आ चुकी है. आज भी अपने सर्जनात्मक कर्म में वह लीन हैं. ऐसे कवि से मेरा साक्षात्कार […]