“अनहद” समकालीन सृजन का समवेत नाद

“अनहद” समकालीन सृजन का समवेत नाद रामजी तिवारी साहित्य को गतिशील बनाये रखने और उसे समाज के बड़े तबके तक पहुँचाने में लघु पत्रिकाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. हिंदी सहित भारत की अन्य भाषाओं में इनका स्वर्णिम इतिहास उपरोक्त तथ्य की गवाही देता है. इन पत्रिकाओं में एक तरफ जहाँ साहित्य कि मुख्य […]