अखिलेश श्रीवास्तव चमन की कहानी ‘सजग-प्रहरी’

अखिलेश श्रीवास्तव चमन   आज की हमारी यह दुनिया बड़ी अजीब है। जिनसे हम मानवता की उम्मीद करते हैं, वही तरह-तरह से मानवता की भावना को आहत करते रहते हैं। यह सब उस धर्म के नाम पर होता है जो मानवीय-मूल्यों की रक्षा के लिए ही अस्तित्व में आया। दुनिया में हर जगह पूँजीवादी सत्ताधारियों […]

अखिलेश श्रीवास्तव चमन की कहानी ‘अनाम रिश्ता’

अखिलेश श्रीवास्तव चमन आधुनिकता की अंधाधुंध दौड़ में रिश्ते नाते सब छीजते जा रहे हैं। वास्तविकता की जगह अब आभासी दुनिया ने ले ली है। लेकिन साहित्य की तो यही ताकत होती है कि वह हमेशा संवेदनाओं के पक्ष में आ खड़ा होता है। वह रिश्ते नाते को बचाने की क्षीण संभावनाओं को भी उकेर […]

अखिलेश श्रीवास्तव चमन का आलेख ‘गिरफ़्त में बचपन’

  बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। उन्हें बचपन में हम जैसा परिवेश देते हैं, भविष्य उसी के अनुसार निर्धारित होता है। न केवल बच्चे का बल्कि हमारे घर, परिवार, समाज और देश का भी। इसमें कोई दो राय नहीं कि आधुनिकता ने हमें ढेर सारी सुविधाएँ प्रदान की हैं लेकिन साथ ही […]