राजेश उत्‍साही का आलेख – बाल साहित्य : चुनौतियाँ और संभावनाएँ :

राजेश उत्‍साही हमारे यहाँ बच्चों की शिक्षा के मायने सिर्फ यही है कि वह स्कूल जाए। पाठ्यक्रम की किताबें पढ़े। होम-वर्क करे। और अच्छे नम्बरों से परीक्षा पास करे। इस बंधी-बधाई दुनिया में थोड़ा मोड़ा टेलीविजन के कार्यक्रम, थोड़ा फेसबुक और व्हाट्स-अप भी अपनी जगह बना लेते हैं। लेकिन इस दुनिया में बाल-साहित्य के लिए […]

अच्युतानंद मिश्र का आलेख ‘शून्यों से घिरी हुई पीड़ा ही सत्य है’

मुक्तिबोध आजाद भारत, जिसके सपने बुनते हमारे तमाम सेनानी अपनी आहुति दे बैठे, उनके लिए एक यूटोपिया ही साबित हुआ जिन्होंने उससे तमाम उम्मीदें पाल रखीं थीं.  शासकों के रंग-रूप तो जरुर बदल गए, लेकिन उनका चरित्र नहीं बदला. कुल मिला कर वह लोकतंत्र ही लहुलुहान होता रहा जिसे आजाद भारत का आधार बनाया गया […]

दारियो फ़ो की मृत्यु पर उनके कलाकार लेखक पुत्र जकोपो फ़ो का वक्तव्य (अनुवाद : यादवेन्द्र)

दारियो फ़ो 1997 के साहित्य नोबेल पुरस्कार विजेता महान इतालवी नाटककार और वामपंथी सांस्कृतिक ऐक्टिविस्ट दारियो फ़ो का इटली के मिलान में 13 अक्टूबर 2016 को निधन हो गया। जीवन की विसंगतियों पर वे जिस तरह से व्यंग्य करते थे वह अपने आप में बेजोड़ होता था। दारियो फ़ो ने चालीस से ज्यादा नाटक लिखे […]

तुषार धवल की कविताएँ

तुषार धवल जिन्दगी के चलने का ढर्रा बेतरतीब होता है। अपनी बेतरतीबी में ही यह वह तरतीब रचती है जिसे कवि, चित्रकार और समाज विज्ञानी अपनी-अपनी तरह से उकेरने का प्रयास आजीवन करते रहते हैं। एक अर्थ में कलाकार जो ललित रचनाओं से जुड़े होते हैं समाज के सजग पहरेदार होते हैं। अपनी रचनाओं के द्वारा […]

मुक्तिबोध के संबंध में विनोद कुमार शुक्ल से घनश्याम त्रिपाठी और अंजन कुमार की बातचीत

मुक्तिबोध मुक्तिबोध जन्म-शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं द्वारा मुक्तिबोध विशेषांक निकाले जा रहे हैं। यह स्वाभाविक होने के साथ-साथ हम सब का दायित्व भी है। इलाहाबाद से प्रकाशित होने  वाली पत्रिका ‘समकालीन जनमत’ का अभी-अभी मुक्तिबोध अंक आया है। इस अंक में मुक्तिबोध के नजदीक रहे कवि विनोद कुमार शुक्ल से साक्षात्कार लिया […]

भारत भूषण जोशी की कहानी ‘गौरदा’

भारत भूषण जोशी संस्कृति मनुष्य को जोड़ने में एक बड़ी भूमिका अदा करती आयी है। हमारे यहाँ धर्म भी इस संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है। यह अटूट पना कुछ इस प्रकार का है कि एक दूसरे को अलगा कर इन्हें जाना और समझा ही नहीं जा सकता। धर्म जिसके अंतर्गत तीज, त्यौहार, परम्पराएँ एक […]

शिरोमणि महतो की कविताएँ

शिरोमणि महतो जीवन-वृत नाम – शिरोमणि महतो जन्म – 29 जुलाई 1973 शिक्षा – एम. ए. (हिन्दी) प्रथम वर्ष सम्प्रति – अध्यापन एवं ‘‘महुआ‘‘ पत्रिका का सम्पादन प्रकाशन – ‘कथादेश’, ‘हंस’, ‘कादम्बिनी’, ‘पाखी’, ‘वागर्थ’, ‘परिकथा’, ‘कथन’, ‘समकालीन भारतीय साहित्य’, ‘समावर्तन’, ‘द पब्लिक एजेन्डा’, ‘सर्वनाम’, ‘जनपथ’, ‘युद्धरत आम आदमी’, ‘शब्दयोग’, ‘लमही’,   ‘नई धारा’,  ‘पाठ’, ‘पांडुलिपि’,  ‘अंतिम […]

अनिल कुमार सिंह का आलेख ‘जीवन-संघर्ष का यथार्थ: मुक्तिबोध की कविता’

मुक्तिबोध मध्यवर्गीय विडम्बनाओं को देखने-पहचानने के लिए आपको जरुरी तौर पर मुक्तिबोध के पास जाना पड़ेगा। उनके लेखन के गहन आशय हैं। जीवन की तल्ख़ अनुभूतियाँ हैं। यह वर्ष मुक्तिबोध का जन्म-शताब्दी वर्ष है। हमारी कोशिश है कि इस महाकवि को याद करते हुए हर माह कम से कम एक आलेख ‘पहली बार’ पर प्रस्तुत […]

लाल बहादुर वर्मा का आलेख – ‘भूमंडलीकरण का सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’।

लाल बहादुर वर्मा भूमंडलीकरण अपेक्षाकृत एक आधुनिक टर्म है जिसने समूची दुनिया को कई अर्थों में सीमित कर दिया है। इस आधुनिकता ने एक तरफ जहाँ दुनिया को एकरूप बनाने में बड़ी भूमिका निभायी है वहीँ इसने कई दिक्कतें भी पैदा की हैं। कहना न होगा कि आज के ताकतवर और साम्राज्यवादी मानसिकता के देश […]

रामजी तिवारी का आलेख ‘अब्बास किआरोस्तमी….’

किआरोस्तमी ईरान को विश्व सिने पटल पर स्थापित करने वाले फिल्मकारों में अब्बास किआरोस्तमी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। ईरान जैसे देश में उपलब्ध कमतर स्पेस में भी उन्होंने ‘अपनी नई धारा’ का विकास कर अपने को साबित तो किया ही साथ ही यह भी सिखाया कि अगर आप में हुनर है […]