प्रद्युम्न कुमार सिंह की कविताएँ

प्रद्युम्न कुमार सिंह युवा कवि प्रद्युम्न कुमार सिंह ने कविता की राह पर चलना अभी शुरू ही किया है। पहले भी मैंने उनकी कविताएँ देखी थीं। तब उबड़-खाबड़ पन ज्यादा था लेकिन अब एक तरतीब उनकी कविताओं में दिखाई पड़ रही है। इन कविताओं को देख कर अब एक आश्वस्ति है कि उनके अन्दर एक […]

सोनी पाण्डेय के कविता संग्रह पर राहुल देव की समीक्षा

सोनी पाण्डेय युवा कवयित्री सोनी की कविताएँ लोक संवेदनाओं से जुड़ी हुईं हैं। उनकी कविताओं में अनुभवजनित जीवन दिखायी पड़ता है। यही नहीं सोनी समकालीन समय के विडम्बनाओं से रु-ब-रु होते हुए उसे अपनी कविता का विषय बनाने का साहस भी करती हैं। ‘बदनाम औरतें’ इसी तरह की कविता है जो इस समय के तमाम […]

प्रदीप त्रिपाठी का आलेख ‘कल्‍पना’ की साहित्यिक जमीन

प्रदीप त्रिपाठी जन्म-  7 जुलाई, 1992 डेली न्यूज ऐक्टिविस्टमें साप्ताहिक लेखन शैक्षणिक योग्यता- एम.ए. हिन्दी (तुलनात्मक सा.),एम. फिल. हिन्दी (तुलनात्मक साहित्य), लोक-साहित्य,एवं कविता-लेखन में विशेष रुचि  विभिन्न चर्चित पत्र-पत्रिकाओं (दस्तावेज़, अंतिम जन, परिकथा, कल के लिए, वर्तमान साहित्य, अलाव, नवभारत टाइम्स, डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट आदि) में शोध-आलेख एवं कविताएं प्रकाशित   गैर हिन्दी भाषी क्षेत्र से प्रकाशित […]

रणविजय सिंह सत्यकेतु की कहानी ‘सुबह के गीत’

14 नवंबर को शहर में साहित्यिक हलचल रही। अवसर था मीरा स्मृति सम्मान और पुरस्कार समारोह का। खुशी की बात है कि इस बार मीरा स्मृति पुरस्कार शहर के ही कथाकार रणविजय सिंह सत्यकेतु को उनकी पांडुलिपि ‘मंडी का महाजाल‘ के लिए दिया गया। मीरा स्मृति सम्मान जिन पांच मनीषियों को दिया गया उनमें प्रो. […]

हरबंस मुखिया की नज्में

हरबंस मुखिया       कविता अपने आप में एक दस्तावेज होती है. उसमें समकालीन समय की आहट के साथ-साथ उस की विडम्बनाओं और विषाद की अनुगूंज भी स्पष्ट तौर पर पढी देखी जा सकती है. कवि अपने समय का पहरेदार होता है. हमेशा सजग-सतर्क-जागरुक. संवेदनशीलता उसे इस कदर परेशान कर देती है कि कबीर […]

इलाहाबाद कार्यशाला की रपट – प्रस्तुति : बजरंग बिहारी

  जनवादी लेखक संघ द्वारा एक से तीन अक्टूबर 2016 को इलाहाबाद में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने ‘वर्ग, जाति तथा जेंडर’ विषय पर अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। देश भर से आए प्रतिभागियों ने अपने सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे जिसके जवाब के क्रम में कई महत्वपूर्ण […]

वैभव सिंह का आलेख ‘अंधेरे मेः आत्मसंघर्ष के निहितार्थ’

मुक्तिबोध हिन्दी की कालजयी कविताओं की जब भी बात की जायेगी ‘अँधेरे में’ कविता की चर्चा जरुर की जाएगी। इस कविता का वितान महाकाव्यात्मक है। काफी लम्बी कविता होने के बावजूद जब हम इसमें प्रवेश करते हैं तो प्रायः वही स्थितियां पाते हैं, मुक्तिबोध जिसके भुक्तभोगी थे। हमारे यहाँ आज भी वही दुरभि-संधियाँ होती हैं। […]

भाविनी त्रिपाठी की कहानी ‘नेवले’

भाविनी त्रिपाठी भाविनी त्रिपाठी बी टेक द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनमें गहरे साहित्यिक संस्कार भरे हुए हैं। उनकी कहानियाँ पढ़ कर आप सहज ही इसका अंदाजा लगा सकते हैं कि भाविनी में भविष्य का एक संभावनाशील रचनाकार संचित है। ‘नेवले’ कहानी के माध्यम से भाविनी ने उन तत्वों को उजागर करने की कोशिश किया […]

सुशान्त सुप्रिय की कविताएँ

सुशान्त सुप्रिय दिल्ली ही भारत का वास्तविक चेहरा नहीं है. बल्कि भारत को देखने के लिए आप को उसके दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ेगा. दिल्ली से बहुत कुछ नहीं दिखता. सुशान्त सुप्रिय ने इसे महसूस करते हुए और इसे अपनी कविता में दर्ज करते हुए लिखा है – मज़दूरों-किसानों के/ भीतर भरा कोयला और/ […]

रेखा चमोली की कविताएँ

प्रेम मानवीय दुनिया की सबसे अनूठी अनुभूति है. प्रेम हमें बराबरी के धरातल पर खड़ा कर देता है. वहाँ न तो किसी किस्म की अहमन्यता होती है न ही किसी तरह का संशय. प्रेम का धरातल विश्वास से ही तैयार होता है. रेखा चमोली के यहाँ प्रेम का अर्थ विस्तीर्ण है जिसमें पूरी मानवता के […]